मध्यप्रदेश में सियासी घमासानः अब कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखा

Samachar Jagat | Wednesday, 18 Mar 2020 07:12:25 AM
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मध्यप्रदेश में सियासी नाटक जारी है. खत लिखे जा रहे हैं. खतों का जवाब दिया जा रहा है. आरोप लग रहे हैं, आरोपों का जवाब दिया जा रहा है. मामला अदालत तक भी जा पहुंचा है. पहले भाजपा सुप्रीम कोर्ट गई तो कांग्रेस कैसे पीछे रहती. कांग्रेस ने भी अर्जी डाल कर गुहार लगाई है. बुधवार को इस पर सुनवाई होगी. इस सियासी उठापटक के बीच राज्यपाल ने मुख्यमंत्री कमलनात को पत्र लिखा तो कमलनाथ ने मंगलवार को राज्यपाल को खत का जवाब दिया. मुख्यमंत्री ने पत्र में खेद जताया कि संसदीय परंपराओं का पालन नहीं करने की उनकी मंशा नहीं थी. कमलनाथ ने राज्यपाल को लंबे पत्र में लिखा कि मैंने अपने चालीस साल के लंबे राजनीतिक जीवन में हमेशा सम्मान और मर्यादा का पालन किया है. आपके पत्र दिनांक 16 मार्च को पढ़ने के बाद मैं दुखी हूं कि आपने मेरे ऊपर संसदीय मर्यादाओं का पालन न करने का आरोप लगाया है. मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, फिर भी आपको ऐसा लगा है तो, मैं खेद व्यक्त करता हूं.

उन्होंने लिखा कि आपने अपने पत्र में यह तो लिखा है कि, सदन की कार्यवाही दिनांक 26 मार्च तक स्थगित हो गई लेकिन स्थगन के कारणों का संभवतः आपने उल्लेख करना उचित नहीं समझा. जैसा कि आप स्वयं जानते हैं कि, हमारा देश व पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से पीड़ित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक अंतररराष्ट्रीय महामारी घोषित किया है. भारत सरकार ने इस बारे में एडवाईजरी जारी की है और समारोह अथवा सार्वजनिक स्थान, भीड़ से बचने के निर्देश दिए हैं. इस कारण अध्यक्ष विधानसभा ने सदन की कार्यवाही 26 मार्च 2020 की प्रातः 11 बजे तक स्थगित की है.

कमलनाथ ने लिखा कि आपने अपने पत्र में यह खेद जताया है कि आपने जो समयावधि मुझे दी थी उसमें विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने के बजाय मैंने आपको पत्र लिखकर फ्लोर टेस्ट कराने में आनाकानी की है. मैं आपके ध्यान में यह तथ्य लाना चाहूंगा कि पिछले पंद्रह महीनों में मैंने सदन में कई बार अपना बहुमत सिद्ध किया है. अब भाजपा यह आरोप लगा रही है तो मेरे पास बहुमत नहीं है तो वे अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से फ्लोर टेस्ट करा सकते हैं. मेरी जानकारी में आया है कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है जो विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है. विधानसभा नियमावली के अनुसार माननीय अध्यक्ष इस पर नियमानुसार कार्यवाही करेंगे तो अपने आप यह सिद्ध हो जाएगा कि हमारा विधानसभा में बहुमत है.

भाजपा पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने खत में कहा है कि मैं बार-बार अपने पत्रों के माध्यम से व आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर उस असाधारण स्थिति के बारे में अवगत करवाता रहा हूं कि जब कांग्रेस के 16 विधायकों को बंगलुरू में भाजपा के नेता अपने साथ चार्टर्ड हवाई जहाज में ले जाकर कर्नाटक पुलिस की मदद से होटल/रिसॉर्ट में बंधक बना कर रखा गया है, जहां उनसे कोई मिल नहीं सकता, बात नहीं कर सकता व भोपाल आने से रोका जा रहा है, जबकि भाजपा के नेता उनके पास आ-जा रहे हैं और उनके मन-मस्तिष्क पर प्रलोभन, डर, दबाव डालकर प्रभाव डाल रहे हैं और झूठे बयान मीडिया में दिलवा रहे हैं.

कमनलाथ ने लिखा है कि मैं पुनः आश्वस्त करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के बंदी बनाए गए सोलह कांग्रेसी विधायकों को स्वतंत्र होने दीजिए और पांच-सात दिन खुले वातावरण में बिना किसी डर-दबाव या प्रभाव के उनके घर पर रहने दीजिए ताकि वे स्वतंत्र मन से अपना निर्णय ले सकें. आपका यह मानना कि दिनांक 17 मार्च तक मध्यप्रदेश विधानसभा में, मैं फ्लोर टेस्ट करवाऊं और अपना बहुमत सिद्ध करूं अन्यथा यह माना जाएगा कि मुझे वास्तव में विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है, पूर्णतः आधारहीन होने से असंवैधानिक होगा. उधर, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा में तत्काल शक्ति परीक्षण कराने की मांग करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर कमलनाथ सरकार से बुधवार तक जवाब मांगा है. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिव को नोटिस जारी किया है. चौहान और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता समेत भाजपा के नौ अन्य विधायक सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 16 मार्च को सदन में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था.

पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने अपनी याचिका में कहा है कि कमलनाथ सरकार के पास सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक, कानूनी, लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार' नहीं रह गया है. सोमवार को तेजी से हुए घटनाक्रम में चौहान और भाजपा के नौ विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए शक्ति परीक्षण कराए बिना 26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित किए जाने के तुरंत बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया. याचिका की अविलंब सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के संबंधित अधिकारी के समक्ष उल्लेख किया गया जिसमें विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और विधानसभा के प्रधान सचिव को मध्य प्रदेश विधानसभा में इस अदालत के आदेश देने के बारह घंटे के भीतर राज्यपाल के निर्देशों के अनुसार शक्ति परीक्षण कराने का आदेश देने की मांग की गई है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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