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इंटरेनट डेस्क। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अब देश के सीएपीएफ जवानों को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से आज बड़ी बात कही है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज एक्स के माध्यम से कहा कि असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया। देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया और इस बलिदान के बदले मिला क्या? 15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं, क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं। यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस संबंध में एक्स के माध्यम से कहा ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं, लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुँह फेर लेती है।
सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं
राहुल गांधी ने इस संबंध मं आगे कहा कि खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है। यह विधेयक केवल एक कॅरियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।
हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं: राहुल
राहुल गांधी ने कहा कि हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं। कांग्रेस का साफ वादा है- हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा, क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
PC: aajtak
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