मंदोदरी की पुत्री थी सीता मगर रावण नहीं था सीता का पिता, जानिए कैसे?

Samachar Jagat | Wednesday, 22 Feb 2017 12:54:47 PM
Sita was Mandodari daughter But Ravana was not father of Sita Know how

रामायण का प्रमुख अध्याय तभी से शुरू होता है जब रावण ने सीता को हराया और इसके बाद राम-रावण का युद्ध हुआ। अधिकरत ग्रंथों में यहीं वर्णन मिलता है कि रावण सीता से विवाह करना चाहता था और जब वह अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए सीता का अपहरण करके ले गया तब उसने सीता के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। लेकिन इसके अलावा कुछ जगहों पर सीता को रावण की पुत्री भी बताया गया है। आज भी इसकी सत्यता के बारे में विद्वान अध्ययन कर रहे हैं। कई विद्वानों का मानना है कि सीता और रावण पिता-पुत्री थे। हालांकि रामायण के सबसे प्रामाणिक ग्रंथ वाल्मीकि रामायण में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता है।

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आपको ये जानकर आश्चर्य होगा की राम के जीवन पर अभी तक करीब 125 अलग-अलग रामायण लिखी जा चुकी हैं। कई ग्रंथों को विद्वान प्रामाणिक मानते हैं तो कई मात्र काल्पनिक हैं। आपको बता दें कि अदभुत रामायण 14वीं शताब्दी में लिखी मानी जाती है। यह मूलतः कथानक न होकर दो प्रमुख ऋषियों वाल्मीकि और भारद्वाज ऋषि के बीच का वार्तालाप है।

इस रामायण में सीता का जन्म मंदोदरी के गर्भ से हुआ था, इसका उल्लेख मिलता है। इस रामायण के अनुसार, एक बार दण्डकारण्य मे गृत्स्मद नामक ब्राह्मण, लक्ष्मी को अपनी पुत्री रूप मे पाने के लिए हर दिन एक कलश में कुश के अग्र भाग से मंत्रोच्चारण के साथ दूध की बूदें डालता था। एक दिन उसकी अनुपस्थिति मे रावण वहां पहुंचा और ऋषियों का रक्त उसी कलश मे एकत्र कर लंका ले गया। कलश को उसने मंदोदरी के संरक्षण मे दे दिया-यह कह कर कि यह तीक्ष्ण विष है, सावधानी से रखे।

इसके बाद रावण विहार करने सह्याद्रि पर्वत पर चला गया। रावण की उपेक्षा से दुखी होकर मंदोदरी ने आत्महत्या करने के लिए जहर समझकर उस घड़े का रक्त पी लिया। इससे अनजाने में ही मंदोदरी गर्भवती हो गई। उसने सोचा मेरे पति मेरे पास नहीं है। ऐसे में जब उन्हें इस बात का पता चलेगा। तो वह क्या सोचेंगे की इस बीच मेरा किसी और पुरुष के साथ संसर्ग हो गया है।

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ऐसा विचार करते हुए मंदोदरी तीर्थ यात्रा के बहाने कुरुक्षेत्र आ गई। वहां उसने गर्भ को निकालकर भूमि में दफना दिया। इसके बाद उसने सरस्वती नदी में स्नान किया और लंका वापस लौट गई। धरती में गढ़ा हुआ यही भ्रूण परिपक्व होकर सीता के रूप में प्रकट हुआ, जो हल चलाते समय मिथिला के राजा जनक को प्राप्त हुआ। अदभुत रामायण में वर्णित इसी कथा के आधार पर माना जाता है कि सीता मंदोदरी की पुत्री थी लेकिन रावण को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

(Source - Google)

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