आतंकवाद के मामले में प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषण में पाकिस्तान के सहयोगी चीन को भी लिया आडे़ हाथों 

Samachar Jagat | Tuesday, 24 Sep 2019 12:09:49 PM
In the matter of terrorism, Prime Minister Modi took Pakistan's ally China in his speech

इंटरनेट डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर संयुक्त राषट्र के एक वार्ता में चीन को अप्रत्यक्ष रूप से आड़े हाथों लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन द्वारा पाकिस्तान की मदद किए जाने पर कहा कि आतंकवादियों को किसी भी तरीके से धन और हथियार नहीं मिलने देने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मकसद को पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र लिस्टिंग और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स जैसे मशीनीकरण के राजनीतिकरण से बचा जाना चाहिए। 74वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर लीडर्स डायलॉग ऑन स्ट्रेटेजिक रिस्पांसेस टू टेरेरिस्ट ऐंड वॉयलेंट एक्ट्रिमिस्ट नरेटिव्ज।


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आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथी विमर्श पर रणनीतिक प्रतिक्रिया से संबंधित नेतृत्व वार्ता  में पीएम मोदी ने ये बातें कहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया में कहीं भी होने वाले आतंकवादी हमले को बड़ा या छोटा या अच्छा या बुरा नहीं बल्कि आतंकवादी कार्रवाई ही माना जाना चाहिए। 74वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर लीडर्स डायलॉग ऑन स्ट्रेटेजिक रिस्पांसेस टू टेरेरिस्ट ऐंड वॉयलेंट एक्ट्रिमिस्ट नरेटिव्जरू आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथी विमर्श पर रणनीतिक प्रतिक्रिया से संबंधित नेतृत्व वार्ता रू में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि इस दिशा में भारत मित्र देशों के क्षमता निर्माण और पहले से जारी सहयोग को बढ़ाने की खातिर काम करेगा।

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इस बैठक के बाद विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) ए गितेश शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि आतंकवादियों को पैसा और हथियार हासिल नहीं होने दिए जाएं। मोदी ने यह भी जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची और वित्तीय कार्य योजना बल (एफएटीएफ) जैसी प्रणालियों का राजनीतिकरण नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों को लागू करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाले आतंकवादी हमले को श्श् आतंकवाद ही माना जाना चाहिए, इसे बड़ा या छोटा अथवा अच्छा या बुरा नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय और क्षेत्रीय ढांचे के जरिए खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया और जारी सहयोग में गुणात्मक सुधार की जरूरत है। भारत के अनुभव को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता और समावेशी विकास, आतंकवाद, कट्टरपंथ और अतिवाद को बढ़ावा देने वाली विचारधाराओं के खिलाफ बेहद अहम हथियार हैं। मोदी ने कहा कि जिस तरह दुनिया ने जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के खिलाफ एकजुटता दिखाई है उसी तरह आतंकवाद के खिलाफ भी वैश्विक एकता और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए। 
 



 

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