नारद के श्राप से अलग हुए राम और सीता!

Samachar Jagat | Friday, 19 May 2017 12:48:38 PM
नारद के श्राप से अलग हुए राम और सीता!

इन्टरनेट डेस्क। सतयुग से लेकर कलयुग तक सभी यह कहते और सुनते आए है कि भगवान राम का कैकेयी की वजह से 14 वर्ष का वनवास हुआ था। जहां से रावण सीता को हरण करके ले गया। जिसकी वजह से राम को सीता का वियोग सहना पड़ा। लेकिन कैकेयी तो केवल माध्यम थी इसके पीछे मुख्य कारण तो कुछ और ही था। 

पौराणिक कहानियों और कथाओं के अनुसार माना जाता है कि नारद जी को एक कन्या पंसद आ गई। नारद जी उस कन्या से विवाह करना चाहते थे। स्वयं को कन्या के समान सुंदर करने के लिए वह श्री विष्णु के पास गए।

उन्होंने भगवान विष्णु को पूरी बात से अवगत नहीं कराया और उनसे एक वरदान मांगने की इच्छा जताई। जिसको भगवान विष्णु ने स्वीकार कर लिया। नारद ने अपने को हरि जैसी छवि देने को कहा।  शायद आप लोगों को ना पता हो हरि और हरी के दो मतलब होते हैं।

हरि माने भगवान यानी स्वयं भगवान विष्णु और हरी का मतलब होता है वानर। नारद मुनि ने हरिमुख मांगा और नारायण ने हरीमुख दे दिया।विष्णु भगवान ने नारद को वानर का मुख दे दिया।

जब नारद मुनि सुंदर कन्या के स्वयंवर में पहुंचे तो लोगों ने उनका काफी मजाक उड़ाया। तो नारद मुनि ने क्रोध में आकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। कि आपको भी एक समय देवी लक्ष्मी से दूर रहना पड़ेगा। उनका वियोग सहना पड़ेगा और आप दोनों का मिलन एक वानर की सहायता से ही होगा। 
 

 

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