कोविंद बोले, राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक का योगदान जरूरी 

Samachar Jagat | Tuesday, 14 Aug 2018 08:21:49 PM
Kovind says, every citizen contribution in nation building is important

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इक्कीसवीं सदी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिसा के सिद्धांतों को प्रासंगिक बताते हुए राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक को अपना योगदान करने का आह्वान किया है, ताकि स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बन सके। कोविंद ने देश के विकास में किसानों, पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों और महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए युवाओं की प्रतिभा को उभरने का अवसर प्रदान करने की भी बात कही है।

वे 72वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को राष्ट्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस बार स्वतंत्रता दिवस की खास बात यह है कि कुछ ही सप्ताह बाद 2 अक्टूबर से महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के समारोह शुरू हो जाएंगे। गांधीजी ने न केवल स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व किया, बल्कि वे देशवासियों के नैतिक पथ-प्रदर्शक भी थे और सदैव बने रहेंगे।

कोविंद ने अहिंसा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गांधीजी का महानतम संदेश यही था कि हिसा की अपेक्षा अहिंसा की शक्ति कहीं अधिक है। प्रहार करने की अपेक्षा संयम बरतना कहीं अधिक सराहनीय है और हमारे समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है।

गांधी ने अहिंसा का यह अमोघ अस्त्र हमें प्रदान किया है। उनकी अन्य शिक्षाओं की तरह अहिसा का यह मंत्र भी भारत की प्राचीन परम्परा में मौजूद था और आज 21वीं सदी में भी हमारे जीवन में यह उतना ही उपयोगी और प्रासंगिक है। राष्ट्रपति ने गांधीजी के विचारों की गहराई को समझने के प्रयास का जरूरत पर बल देते हुए कहा कि गांधीजी को राजनीति और स्वाधीनता की सीमित परिभाषाएं मंजूर नहीं थीं।

गांधीजी जब और उनकी पत्नी कस्तूरबा, चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों के आंदोलन के सिलसिले में बिहार गये तो वहां उन्होंने काफी समय स्थानीय लोगों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों, को स्वच्छता और स्वास्थ्य की शिक्षा देने में लगाया। चंपारण में और अन्य बहुत से स्थानों पर गांधीजी ने स्वयं स्वच्छता अभियान का नेतृत्व भी किया।

उन्होंने साफ-सफाई को आत्मानुशासन और शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए माना। उन्होंने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने के लिए लोगों को गरीबी एवं असमानता से मुक्ति दिलाने, विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने, महिलाओं की आजादी को व्यापक बनाने एवं उनके वास्ते सुरक्षित वातावरण तैयार करने और युवाओं की प्रतिभाओं को उभारने का आह्वान भी किया।



 

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