धूमधाम से मनाई जा रही हैं जन्माष्टमी, कान्हा के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता

Samachar Jagat | Monday, 03 Sep 2018 10:03:24 AM
Krishna Janmashtami Celebrated in india

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देशभर में भगवान विष्णु के 8 वें अवतार यानि श्रीकृष्ण का जन्‍मोत्‍सव आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी की धूम रविवार से ही है। इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2 अलग-अलग तारीखों पर पड़ी है। हो सकता है कि आप सोच रहे हों कि ऐसा क्‍यों होता है। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 2 दिन पड़ रही है, जिसमें पहला दिन यानि 2 सितंबर स्मार्त का होगा और 3 सितंबर को वैष्णव संप्रदाय की जन्माष्टमी होगी।

हिंदू ग्रन्थ धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के मुताबिक जन्माष्टमी का दिन स्पष्ट निर्धारित किया गया है, जो कि स्मार्त अनुयायियों के लिए है। वहीं, वह लोग जो वैष्णव सम्प्रदाय के अनुयाई नहीं हैं, उन्‍हें हिंदू ग्रंथ में बताए गए नियमों के तहत जन्माष्टमी का दिन निर्धारित करना चाहिए।

हिंदू शास्त्रों के मुताबिक श्री कृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में हुआ था इसलिए हर साल  इसी तारीख और इसी नक्षत्र में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। 2 सिंतबर को निशीथ काल में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र मिल रहा है जिसकी वजह से स्मार्त संप्रदाय वाले जन्माष्टमी का त्‍योहार मनाएंगे।

वहीं 3 सितंबर को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र उदया तिथि मिल रही है, इसलिए वैष्णव संप्रदाय वाले इस दिन जन्माष्टमी मनाएंगे जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 2 सितंबर रविवार को पड़ रहा है। भारतीय समयानुसार रविवार रात्रि को 08 बजकर 49 मिनट से लेकर अगले दिन सोमवार शाम 07 बजकर 23 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। रविवार को ही रोहिणी नक्षत्र रात्रि 08 बजकर 49 मिनट से लेकर सोमवार को रात्रि 08 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

जयपुर के गोविंद देव मंदिर में लगा भक्तों का तांता
भगवान श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए भक्तों का रात्रि एक बजे से ही पहुंचाना शुरू हो गया, भक्त नंद के आनंद भैया जय कहैन्या लाल की जयकारों के साथ जयपुर शहर के आराध्य देव के दर्शन कर रहे है। आज रात्रि 12 बजे बालगोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है। 

जन्माष्टमी पर देश भर के श्रद्धालु पहुंच रहे मथुरा-वृन्दावन
मथुरा में भी आज जन्माष्टमी पूर्व की धूम मची हुई है। इस मौके पर दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मथुरा-वृन्दावन एवं ब्रज के अन्य धर्मस्थलों की ओर उमड़ रहे हैं। देश के कई हिस्सों से आ रहे श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा हुआ है।

मथुरा-वृन्दावन की ओर आने वाले हर मार्ग पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। लोग मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्बारिकाधीश मंदिर, वृन्दावन के बांकेबिहारी, राधावल्लभ लाल, शाहबिहारी, राधारमण, अंग्रेजों के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर, 21वीं सदी में बनाए गए स्नेह बिहारी व प्रेम मंदिर, बरसाना के लाड़िली जी, नन्दगांव के नन्दबाबा मंदिर, गोकुल के नन्दभवन आदि की ओर पैदल ही जा रहे हैं। हर तरफ कान्हा के जन्म को लेकर उल्लास छाया हुआ है। जगह-जगह प्रभु का प्रसाद बांटा जा रहा है। 

सुरक्षा का खास प्रबंध 
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सुरक्षा के खासा प्रबंध किए गए हैं। मथुरा-वृन्दावन नगर निगम की ओर से श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर जाने वाले हर चौराहे- रास्ते को बड़ी ही शिद्दत से सजाया गया है। सोमवार की रात्रि में भगवान के जन्म के मौके 12.00 बजे से 12.10 बजे तक प्रकट्योत्सव, 12.15 से 12.30 बजे तक महाभिषेक कराया जाएगा। तत्पश्चात 12.40 से 12.50 बजे तक श्रृंगार आरती और फिर 1.30 बजे तक दर्शन होंगे।

द्बारिकाधीश मंदिर में सुबह 6.00 से 6.15 बजे मंगला, 6.30 से श्रृंगार और 8.30 बजे से ग्वाल राजभोग के दर्शन होंगे। शाम को 7.30 बजे से भोग संध्या आरती और शयन के दर्शन होंगे। रात को 10 बजे से जागरण और 11.45 बजे भगवान जन्म के दर्शन होंगे।  दक्षिण भारतीय परंपरा के रंगजी मंदिर में सोमवार रात जन्मोत्सव मनाने के बाद अगले दिन नंदोत्सव के दौरान लट्ठा के मेला का आयोजन होगा।

अन्य मंदिरों में जन्माष्टमी के लिए तैयारियां की गयी हैं। इस्कॉन मंदिर के प्रवक्ता ने बताया कि जन्मोत्सव पर अष्टप्रहर आरती होगी। लंदन में तैयार हुई ठाकुरजी की पोशाक धारण कराई जाएगी। रात 9 बजे से हरिनाम संकीर्तन के साथ बारह बजे तक ठाकुरजी का महाभिषेक होगा।

इसके बाद महाआरती होगी। ब्रज के हर घर में कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। यहां परंपरा है कि दिन भर व्रत रखकर मध्य रात्रि में खीरे का चीरा लगाकर शालिग्राम की बटिया के रूप में ठाकुर के जन्म की परंपरा निभाई जाती है।

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