राहुल गांधी ने किया फिर जीएसटी को लेकर व्यंग्य 

Samachar Jagat | Tuesday, 05 Dec 2017 12:52:43 PM
Rahul Gandhi did a satire about GST

नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले अपने प्रचार के दौरान मोदी सरकार से लगातार पूछे जा रहे अपने सवालों का सिलसिला जारी रखते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक और सवाल दागा है। राहुल ने अपने नए सवाल में नोटबंदी, जीएसटी और महंगाई के साथ ही भाजपा से गुजरात में उसके 22 साल के शासन का हिसाब मांगा है। ट्विटर पर पूछे जा रहे अपने सातवें सवाल में राहुल ने कहा है, 22 सालों का हिसाब गुजरात मांगें जवाब।

प्रधानमंत्री जी-7वां सवाल। उन्होंने लिखा है, जुमलों की बेवफाई मार गई। नोटबंदी की लुटाई मार गई। सारी कमाई मार गई। बाकी कुछ बचा तो - महंगाई मार गई। बढ़ते दामों से जीना दुश्वार। बस अमीरों की होगी भाजपा सरकार। मजे की बात यह है कि राहुल गांधी इससे पहले जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बोल चुके हैं।

वहीं इसपर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राहुल गांधी के इस विचार को ग्रैंड स्टुपिड थॉट बताया था। गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए नौ और 14 दिसंबर को दो चरणों में होने वाले मतदान के मद्देनजर अपने प्रचार और मोदी सरकार के खिलाफ वार की धार तेज करते हुए राहुल 28 नवंबर से लगातार प्रधानमंत्री से एक-एक सवाल पूछ रहे हैं।उनका पहला सवाल था, 2012 में वादा किया कि 50 लाख नए घर देंगे। पांच साल में बनाए 4.72 लाख घर।

प्रधानमंत्री जी बताइए कि क्या ये वादा पूरा होने में 45 वर्ष और लगेंगे दूसरा सवाल था, 1995 में गुजरात पर कर्ज -9,183 करोड़। साल 2017 में गुजरात पर कर्ज -2,41,000 करोड़। यानी हर गुजराती पर 37,000 कर्ज। आपके वित्तीय कुप्रबन्धन और पब्लिसिटी की सजा गुजरात की जनता क्यों चुकाए राहुल का तीसरा सवाल था, 2002-16 के बीच 62,549 न की बिजली खरीद कर 4 निजी कंपनियों की जेब क्यों भरी सरकारी बिजली कारख़ानों की क्षमता 62 घटाई पर निजी कम्पनी से 3 यूनिट की बिजली 24 तक क्यों खरीदी जनता की कमाई, क्यों लुटाई उनका चौथा सवाल था, सरकारी स्कूल-कॉलेज की कीमत पर किया शिक्षा का व्यापार।

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महंगी फीस से पड़ी हर छात्र पर मार। राहुल का पांचवा सवाल था, न सुरक्षा, न शिक्षा, न पोषण, महिलाओं को मिला तो सिर्फ शोषण। आंगनवाड़ी वर्कर और आशा, सबको दी बस निराशा। गुजरात की बहनों से किया सिर्फ वादा, पूरा करने का कभी नहीं था इरादा। कांग्रेस के भावी अध्यक्ष का छठा सवाल था, बीजेपी की दोहरी मार एक तरफ युवा बेरोजगार।

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दूसरी तरफ लाखों फिक्स पगार और कांट्रैक्ट कर्मचारी बेजार। 7वें वेतन आयोग में 18000 मासिक होने के बावजूद फिक्स और कांट्रैक्ट पगार 5500 और 10,000 क्यों।  गौरतलब है कि गुजरात में गत दो दशक से भी ज्यादा वक्त से बीजेपी का शासन है और कांग्रेस इस चुनाव में प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए एडी चोटी का जोर लगाए हुए है।



 

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