मुंबई 26/11 हमले की बरसी पर शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि, भयावह पलों को याद किया

Samachar Jagat | Saturday, 26 Nov 2016 10:19:53 PM
मुंबई 26/11 हमले की बरसी पर शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि, भयावह पलों को याद किया

मुंबई। महानगर में आठ वर्ष पहले आज ही के दिन हुए आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले शहीदों को आज याद किया गया तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में श्रद्धांजलि दी गयी। इस भीषण आतंकवादी हमले में 166 लोग मारे गये थे। 

इस आतंकवादी हमले में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों के परिजनों एवं इसके प्रभावितों ने इस भीषण अनुभव के भयावह पलों को याद किया तथा आतंकवाद का सफाया करने में सहयोग देने का संकल्प जताया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने दक्षिण मुंबई के मुंबई पुलिस जिमखाना में 26/11 पुलिस स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, ''मुंबई की सुरक्षा के लिए लडऩे वाले और 26 नवंबर को हमारे लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले पुलिसकर्मियों को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। हमें उन पर गर्व है और हम अपने राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर प्रयास करेंगे।

इस अवसर पर राज्यपाल सी विद्यासागर राव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त जूलियो रिबेरो, एम एन सिंह और कई वरिष्ठ और पूर्व पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि समुद्री रास्ते से 26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकवादी यहां पहुंचे और लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी जिसमें 18 सुरक्षा कर्मियों सहित 166 लोग मारे गये और कई अन्य घायल हो गये थे। आतंकियों ने करोड़ों रूपये की संपत्ति को नुकसान भी पहुंचाया था। 

उस समय के एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, सेना के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक कामटे और वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर विजय सालस्कर सहित कई अन्य लोग हमले में मारे गये थे। 

यह हमला 26 नवंबर को शुरू हुआ था और यह 29 नवंबर तक जारी रहा था। छत्रपत्रि शिवाजी टर्मिनस, ओबरॉय ट्राइडेंट, ताजमहल पैलेस एंड टॉवर, लेपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल, नरीमन हॉउस यहूदी सामुदायिक केन्द्र आदि वे स्थान थे जिन्हें आतंकवादियों ने निशाना बनाया था। 

अजमल कसाब एकमात्र आतंकवादी था जिसे जिंदा पकड़ा गया। चार साल के बाद उसे 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गयी थी। 

इंडियन एक्सपे्रस ने फेसबुक एवं इंस्टाग्राम के सहयोग से एक वीडियो प्रदर्शनी आयोजित की गई जिसका शीर्षक था, ''2611 ताकत की गाथाएं"। इसमें फडणवीस ने कहा कि सुरक्षा उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकी के साथ मानव बल का लाभ लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 208 का मुंबई हमला भारत का अपमान था जहां दस आतंकवादियों ने पूरे देश को परेशान कर डाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व को आतंकवादी हमलों से निबटने में मुंबई द्वारा दिखाई गई सहनशीलता पर गर्व करना चाहिए।

भीषण हमले में अपने परिवार को गंवाने वाली किया शेएर ने कहा कि वह और उनका परिवार फ्लोरिडा में केवल समाचार ही देख सकते थे और उस समय शहर में अपने रिश्तेदारों की आवाज सुनने को बेताब थे। 

उन्होंने कहा, ''मेरे परिवार को मारने वालों को मैने माफ कर दिया है क्योंकि मैं क्रोध के बोझ से निजात पाना चाहती हूं। हमले होने के बाद से मुंबई में मेरा पुनर्जन्म हुआ है। मुझे यहां के लोगों से बहुत प्रेम और उदारता मिली।

हमले में बच गये सौरभ मिश्रा ने बताया कि जब आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं उस समय वह कोलाबा के कैफे लियोपोल्ड में थे। जिंदा बच जाने के कारण मैं अपने को सौभाग्यशाली मानता हूं। 

उन्होंने बताया, ''मेरे भीतर गोलियां बिंधने के बाद मैं एक दरवाजे से बाहर निकलने में सफल रहा। उस समय किसी फिल्मी दृश्य जैसा लग रहा था, सब कुछ धुंधला धुंधला सा। कैफे के बाहर एक स्थानीय दुकानदार मुझे अस्पताल ले गया और उस समय मुझे लग रहा था कि मैं बच नहीं पाउंगा। मैं आज अपने को सौभाग्यशाली मान रहा हूं।

इस अवसर पर हुई सामूहिक चर्चा में भाग लेते हुए मुंबई पुलिस के संयुक्त आयुक्त कानून व्यवस्था, देवेन भारती ने कहा कि सुरक्षा बलों ने कभी सोचा ही नहीं था कि 2611 के पैमाने वाला कोई हमला होगा।
भाषा

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