पर्यटन डायरी: शाम होने से पहले खाली हो जाता है यह किला, भरी दोपहरी में भी सैलानियों के छूटते हैं पसीने

Samachar Jagat | Monday, 02 Sep 2019 12:49:50 PM
bhangarh fort called as Scary fort and tourist place of india

इंटरनेट डेस्क। घूमने का शौकीन तो हर कोई होता है। कुछ एडवेंचर्स के हिसाब से घूमना पसंद करते हैं, जैसे ट्रेकिंग, स्काइंग के लिए वह हिमाचल प्रदेश जैसी जगहों पर जाते हैं। कुछ  सैलानी ऐेसे हाते हैं जो नेचुरल व्यूज जैसे पहाड़, पानी हरियाली के लिए हिमाचल प्रदेश, कश्मीन, ऊंटी, नेनीताल और मैसूर जैसे हिल स्टेशन की ओर रुख करते हैं। लेकिन, भारत में कुछ जगह ऐसी भी हैं जो अपने हॉरर यानि डरावने होने की वजह से जानी जाती हैं।


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एक ऐसी जगह के बारे में ही आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसका नाम सुनते ही सैलानी रोमांचित हो उठते हैं साथ ही डर भी जाते हैंं। हम बात कर रहे हैं भारत के राजस्थान राज्य के अलवर जिले की राजगढ़ तहसील में स्थित  भानगढ़ किले की। इस जगह के बारे में यह प्रचलित है कि यहां की इमारते उल्टी दिखाई पड़ती हैं और दिन ढलने से पहले ही यहां से निकलने में ही भलाई है। यहां पांच बजे बाद पर्यटक से लेकर स्थानीय निवासी भी अपने घरों की और लौट जाते हैं। इसे भुतहा किला भी कहा जाता है।  इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार इस किले को आमेर के कच्छवाहा शासक राजा भगवंत दास ने 1573 में बनवाया था। 

लेकिन इस किले को मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में अपने रहने का ठिकाना बना लिया था। इस जगह के वीरान होने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा में यह कहा जाता है कि भानगढ बालूनाथ योगी की तपस्या स्थल था। योगी ने अपनी तपस्या में विधान नहीं पडऩे की शर्त पर यहां किले के निर्माण की इजाजत दी थी, लेकिन राजा के वंशज इस शर्त को  नहीं कर सके और उनके द्वारा तय किए गए नियम पूरे नहीं कर सके और 

उन्होंने इस किले के ध्वस्त होने का श्राप दे दिया और यह किला ध्वस्त हो गया जो आज तक ऐसा है। जबकि दूसरी कथा में यह कहा गया है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती पर एक तांत्रिक मोहित था, लेकिन सभी प्रयासों बावजूद उसे पा ना सका, मरते-मरते वो तांत्रिक राजकुमारी और भानगढ़ रियासत को श्राप दे गया जिसके बाद से भानगढ़ किला तहस नहस हो गया। 

माधो सिंह के सुजान सिंह, छत्र सिंह, तेज सिंह नामक तीन पुत्र थे माधो सिंह के बाद छत्र सिंह भानगढ़ का शासक हुआ। छत्र सिंह के पुत्र अजब सिंह थे। अजब सिंह ने अपने नाम पर अजबगढ़ बसाया था। अजब सिंह के पुत्र काबिल सिंह और इनका बेटा जसवंत सिंह अजबगढ़ में रहे। यह जगह आज भी सबसे खतरनाक जगहों के रूप मे जानी जाती है। यहां शाम पांच बजे बाद रुकने की इजाजत नहीं है, जगह, जगह प्रशासन की तरफ से साइन बोर्ड लग रहे हैं।

इस जगह को देखने हर रोज सैकड़ों पर्यटक आते हैं, लेकिन, शाम होने से पहले यहां से रवाना हो जाते हैं। लोगों के बीच में इस जगह को लेकर कई दहशत भरी भ्रांति फैली हैं, जिसकी वजह से लोग यहां आने के नाम से ही डरते हैं। हालांकि, यहां कई बार कई संगठन, कई मीडिया हाऊस ने लंबी रिसर्च की लेकिन, ऐसी घटना अभी तक सामने नहीं आई है जिससे कोई नुकसान पहुंचा हो। लेकिन, फिर भी इस किले में जाने वाले पर्यटकर ओर आसपास रहने वाले लोग इस प्रचलित कथा के आधार पर  भ्रांतियां बनाए हुए हैं कि यहां शाम होने से पहले निकल जाना ही बेहतर है।  

कई बार जब पर्यटक वहां इस बारे में पूछते हैं तो स्थानीय निवासी भी यही सलाह देते हैं कि आप यहां से दिल ढलने से पहले निकल जाइये। यहां अजीब आवाजे सुनाई देती हैं, इस कारण पर्यटकों में और भी भय पैदा होता है। यहां जाने को पर्यटक उत्साहित तो रहते हैं लेकिन, किले में पहुंचने के बाद दिन दोपहरी में यहां वीरानी और पसरे सन्नाटे को देखकर उनके पसीने छूट जाते हैं। इसलिए पर्यटक खुद ही वहां से जल्द से जल्द निकलने की कोशिश करते हैं। अगर कोई देर तक रुकता भी है तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी उन्हें वहां से जल्दी रवाना करवा देते हैं।

नोट :- हमारी साइट किले के बार में किसी भी प्रकार की बातों का समर्थन और ना ही दावा करती है। ना ही इन तथ्यों के सच्चे, झूठे होने का दावा करती है।  यह जानकारी लंबी रिसर्च के बाद हासिल की गई है, जानकारी को हासिल करने में वहां जा चुके सैलानी ओर स्थानीय निवासियों से भी बातचीत की गई है। जानकारी जुटाने में विकिपीडिया ओर अन्य इंटरनेट स्रोत से भी इनपुट लिया गया है।
 



 

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