केंद्रीय मंत्रियों के वेतन भत्तों पर दोगुना खर्च

Samachar Jagat | Friday, 12 Jul 2019 09:52:35 AM
Double spend on salary allowances of Union Ministers

केंद्रीय मंत्रियों के वेतन भत्तों और यात्राओं पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने आवंटित राशि से दोगुना खर्च किया है। यह खुलासा बीते शुक्रवार को पेश किए गए आम बजट के व्यय संबंधी आंकड़ों से हुआ है। अन्य विभागों की तरह मंत्रिपरिषद को भी अपने साल भर के खर्चों के लिए बजट में हर साल एक तय राशि मिलती है। इसमें मंत्रियों के वेतन भत्ते, वैभव पर खर्च होने वाली राशि, हवाई यात्राएं, अति विशिष्ट मंत्रियों को ले जाने के लिए प्रयुक्त होने वाले हवाई जहाजों के रखरखाव का खर्च भी शामिल होता है। मंत्रिपरिषद के नाम आवंटित होने वाले इस बजट में सभी कैबिनेट मंत्री राज्यमंत्री तथा पूर्व प्रधानमंत्री आते है। 

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बजट दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2018-19 के दौरान मंत्रिपरिषद के लिए 295.81 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई थी। लेकिन वर्ष का जो संशोधित बजट मंजूर किया गया है, उसमें इस मद में 599.91 करोड़ रुपए का खर्च दिखाया गया है, जो आवंटित बजट के दोगुने से भी अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय मंत्रियों के लिए जो राशि आवंटित की गई वह जरूरत से कम थी। दूसरा, कारण यह हो सकता है कि मंत्रियों ने जरूरत से ज्यादा खर्च किया। वैसे यदि 2017-18 के आंकड़े देखें तो तब मंत्रिपरिषद को 395 करोड़ रुपए आवंटित हुए थे। लेकिन 2018-19 के दौरान इसमें सौ करोड़ की कटौती कर दी गई। हालांकि जो वास्तविक खर्च हुआ है, वह 300 करोड़ ज्यादा हुआ है। 

संभवत: इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019-20 के लिए मंत्रिपरिषद को अपेक्षाकृत पिछले साल की तुलना में ज्यादा बजट आवंटित किया गया है। इस बार बजट में 454.87 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। पिछले साल की तुलना में यह राशि तकरीबन 50 फीसदी ज्यादा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 में जब 100 करोड़ की कटौती की गई थी, इसके बावजूद वास्तविक खर्च ज्यादा हुआ। इस प्रकार 100 करोड़ की कटौती करना तथा न करना बराबर सा ही है। जरूरत इस बात की है कि मंत्रियो को अपने खर्चों में कटौती करके आम जनता के सामने एक नजीर पेश करनी चाहिए। मंत्री ही जब आवंटित बजट से ज्यादा खर्च करेंगे तो वित्तीय अनुशासन कैसे रहेगा?



 

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