नई रक्षा खरीद नीति का मसौदा

Samachar Jagat | Friday, 13 Apr 2018 10:42:10 AM
Draft new defense procurement policy

सरकार ने प्रस्तावित नई रक्षा खरीद नीति के मसौदे में लड़ाकू विमानों से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। रक्षा खरीद नीति के इस मसौदे में तमाम अत्याधुनिक हथियार और उपकरण बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 2025 तक देश में ही यात्री विमान बनाने का खाका पेश किया गया है। इसके लिए रक्षा क्षेत्र में प्र्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने का इरादा है। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा खरीद नीति 2018 का मसौदा जारी कर इस पर सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नई रक्षा खरीद नीति का मकसद सेना के लिए जरूरी हथियारों से लेकर साजो सामान की आपूर्ति में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना है।

 नई नीति में इस खरीद का स्वरूप बदला है। इसके तहत सब कुछ बना बनाया आयात करने के बजाए विदेशी कंपनियों को देशी कंपनियों की साझेदारी में रक्षा उपकरणों का निर्माण भारत में करने को कहा जाएगा। रक्षा क्षेत्र में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रोत्साहित कर 2025 तक रक्षा कारोबार को सालाना एक लाख 70 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। मसौदे के मुताबिक 70 हजार करोड़ के अतिरिक्त निवेश से रक्षा क्षेत्र में 2025 तक 20 से 30 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे, प्रस्तावित नीति के सहारे हथियारों के निर्माण में अपनी जरूरतों को पूरी करने के साथ-साथ इनका दूसरे देशों को निर्यात करने की भी योजना है। 2025 तक भारत का रक्षा निर्यात 35 हजार करोड़ रुपए तक ले जाने का लक्ष्य प्रस्तावित है। इस मसौदे में देश में नागरिक विमान का निर्माण करने की भी योजना बनाई गई है। भारत में अभी सभी बड़े यात्री विमान विदेशी कंपनियों से खरीदे जाते हैं।

 प्रस्तावित नीति में 80 से 100 सीटों वाले यात्री विमान का देश में ही निर्माण अगले सात साल में शुरू करने की बात कही गई है। रक्षा खरीद नीति के मसौदे के अनुसार हथियारों और उपकरणों के क्षेत्र में सक्षम होने की ओर बढ़ने के लिए कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा। इनमें लड़ाकू विमान, मध्यम श्रेणी के हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, ऑटोमेटिक हथियार प्रणाली, सर्विलांस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से लेकर मिसाइल सिस्टम आदि प्रमुख है। सरकार का इरादा अगले सात वर्षों में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, छोटे श्रेणी के हथियार और युद्धपोत में देश को आत्मनिर्भर बनाने की है। गन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और लैंड काबेट वाहन की जरूरतों को भी देश में ही पूरी तरह इन सात वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

 यहां यह बता दें कि पिछले दिनों बजट सत्र के दौरान रक्षा मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की संसद में पेश की गई रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जाहिर की गई है कि सेना के पास 67 फीसदी हथियार पुराने हैं और अत्याधुनिक हथियारों की सेना में भारी कमी है। हमें अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में रक्षा खरीद की नई नीति का जो मसौदा प्रस्तुत किया गया है, उसको समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए कदम उठाए जाने से न केवल हमारी विदेशी कंपनियों पर निर्भरता समाप्त होगी, वरन हम इस क्षेत्र आत्मनिर्भर होने के साथ ही आधुनिक हथियारों का निर्यात कर सकेंगे।



 

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