मानसून की बेरुखी ने बिगाड़ा बुवाई का आंकड़ा

Samachar Jagat | Tuesday, 12 Sep 2017 01:34:38 PM
मानसून की बेरुखी ने बिगाड़ा बुवाई का आंकड़ा

दक्षिणी  राज्यों में सूखा और अन्य खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में अगस्त के दौरान मानसून की बेरुखी ने खरीफ सीजन के बुवाई आंकड़ों को बिगाड़ दिया है। अगस्त में कई महत्वपूर्ण खाद्यान्न उत्पादन राज्यों में कम बारिश ने बुवाई की रफ्तार को रोक दिया। इसके चलते आखिरी चरण में होने वाली बुवाई प्रभावित हुई है। नतीजन बुवाई का रकबा कम हो गया है। खरीफ सीजन की अहम फसल धान की रोपाई पिछड़ गई है। कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल में धान की खेती का रकबा कम हुआ है। 

महाराष्ट्र, असम, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के राज्यों में रोपाई प्रभावित हुई है। कृषि मंत्रालय की ओर से जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार अभी तक 3.66 करोड़ हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में 3.72 करोड़ हेक्टेयर हो चुकी थी। बीते फसल वर्ष में दलहन की पैदावार को लेकर उत्साहित सरकार के लिए चालू खरीफ सीजन निराशाजनक साबित हो सकता है। 

चालू सीजन में दलहन फसलों की बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले घटा है। अब तक 1.37 करोड़ हेक्टेयर में दलहन की खेती हुई है, जबकि इसी अवधि तक 1.43 करोड़ हेक्टेयर में दलहन फसले बोई गई थी, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बुवाई घट गई है। तिलहन फसलों का बुवाई का रकबा 1.66 करोड़ हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल की इस अवधि तक यह 1.80 करोड़ हेक्टेयर हो गया था।

 मूंगफली और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई घटी है। पूर्वी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ में सूखे की वजह से मूंगफली और सोयाबीन की खेती प्रभावित हुई है। सोयाबीन बुवाई सात लाख हेक्टेयर से ज्यादा घट गई है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी रकबा घटा है। हालांकि मोटे अनाज वाली फसलों की बुवाई ने लौटते मानसून के साथ रफ्तार पकड़ा है। किसी भी देश की खेती बाड़ी, रहन-सहन, उद्योग-धंधे काफी हद तक मौसम पर ही निर्भर रहते हैं। 

भारत के प्रसंग में तो यह बात और भी गौरतलब है। हमारे अर्थशास्त्री यही मानते हैं कि मानसून की चाल में जरा सा भी उथल-पुथल देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर सकता है। यहां यह बता दें कि पिछले सात-आठ वर्षों में मौसम में अचानक भारी उथल-पुथल पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में दर्ज की गई है। कहीं भारी बारिश से बाढ़, सूखे और भारी बर्फबारी के हालात पैदा हो रहे हैं। तो कहीं तूफान-चक्रवात बड़े पैमाने पर तबाही मचा रहे है। 

वैसे मौसम विभाग मानसून, सूखे या सर्दी-गर्मी के संकेतों के जरिए देश और जनता को सतर्क करता रहा है। लेकिन आधी-अधूरी भविष्यवाणियों और मौसम की अप्रत्याशित करवटों से बचाने वाले इंतजामों की कमी के कारण मानसून मुसीबतें हम पर कहर बनकर टूटने लगी है।

 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2017 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.