बढ़ता तापमान विश्व के लिए बड़ा खतरा

Samachar Jagat | Wednesday, 08 Nov 2017 01:27:36 PM
Increasing temperature is a major threat to the world

जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मुख्य फोकस वैश्विक तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने पर रहेगा। पेरिस समझौते के तहत पिछले साल इस मुद्दे पर विश्व के तमाम देशों में सहमति बनी थी। जिसके क्रियान्वयन के लिए अब पहल होगी यह सम्मेलन आगामी 17 नवंबर तक चलेगा। सबसे अहम बात यह है कि सन् 2100 तक वैश्विक तापमान बढ़ोतरी दो डिग्री के नीचे ही रखा जाए। 

क्योंकि जिस रफ्तार से दुनिया चल रही है, उससे तापमान बढ़ोतरी तीन-साढ़े तीन डिग्री तक होने की आशंका है, जो विश्व के लिए बड़ा खतरा होगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि पेरिस में 190 देशों ने इसे दो डिग्री के नीचे तक सीमित रखने पर सहमति प्रकट की है और आदर्श रखने पर सहमति प्रकट की है और आदर्श स्थिति डेढ़ (1.5) डिग्री सुझाई गई है। यहां यह बता दें कि बॉन में राष्ट्रों को अपने देशों में ग्रीन हाउस गैसों में उत्सर्जन के लिए अपने लक्ष्य घोषित करने होंगे। प्रत्येक पांच साल में इनकी समीक्षा होगी तथा उन्हें नए तरीके से निर्धारित किया जा सकता है।

 दरअसल, कई देशों ने स्वेच्छा से अपने लक्ष्य बताए हैं, लेकिन कई देश अभी पीछे हैं। 148 देश उत्सर्जन में कमी लाने को तैयार है, लेकिन सभी ने इसके लिए आवश्यक लक्ष्य तैयार नहीं किए हैं। इस सिलसिले में भारत का पक्ष मजबूत है। हमारे देश में कई पहल हुई है। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में 1.75 लाख मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे एलईडी बल्ब, विद्युत उपकरणों की स्टार रेटिंग, ग्रीन बिल्डिंग, वनीकरण के लिए 40 हजार करोड़ का कैप फंड आवंटन ऐसे प्रयास है, जो जलवायु परिवर्तन के खतरों के निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि पेरिस समेत पूर्व में हुए कई समझौतों में इस बात पर सहमति बनी है कि धनी देश गरीब देशों को इस खतरे से निपटने के लिए आर्थिक मदद देंगे।

 इसके लिए 2020 तक 100 अरब डालर का वार्षिक हरित कोष बनाने की बात है। लेकिन इस कोष में अभी तक बहुत कम राशि आ रही है। जलवायु परिवर्तन से होने वाली क्षति को लेकर भी पेरिस में चर्चा हुई थी और सहमति भी। लेकिन इसके लिए क्या तंत्र होना चाहिए इस पर चर्चा होगी। इसी प्रकार जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए गरीब और विकासशील देशों को कम कीमत पर हरित तकनीक नहीं मिल पा रही है। तकनीकों के स्थानांतरण का एक सर्वमान्य तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।



 

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