देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर बारिश का कहर

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Jul 2019 03:29:28 PM
Rainfall of rain on the country's financial capital Mumbai

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अप्रत्याशित जल भराव से जनजीवन जिस तरह पंगु होकर रह गया है, कहना मुश्किल है कि यह कुदरती कहर है या मानव की आपराधिक भूलें। यह सही है कि बीते सप्ताह मंगलवार को पिछले चार दशक में दूसरी बार इतना पानी बरसा कि मुंबई थम सी गई। शिक्षण संस्थान व कारोबार बंद होने के साथ सडक़, रेल यातायात और हवाई सेवाएं बुरी तरह बाधित हुई। इस दौरान तीन दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें दीवार गिरने तथा एक डैम के टूटने से होने वाली मौतें भी शामिल है। दरअसल, जिस तरह से मुंबई का विस्तार किया गया है, उसमें कहीं न कहीं कुदरत की मूल संरचना से छेड़छाड़ हुई है। कुछ पहाडि़यों और मुंबई के बीच का जो खाड़ी क्षेत्र हुआ करता था, उसमेें निर्माण की जो पर्यावरण विरोधी कोशिशें हुई है उसने बारिश के पानी के स्वाभाविक प्रवाह को बाधित किया है। 

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तीन तरफ से समुद्र से घिरे मुंबई के बीच में दलदलीय वन क्षेत्र था, वह समुद्र के अतिरेक पानी को सोख लेता था। झुग्गी-झोंपडि़यों के लगातार विस्तार और अतिक्रमण के चलते होने वाले निर्माण में उन जल निकासी के रास्तों को अवरूध किया गया है जो जल भराव से मुंबई को बचाते थे। विडंबना यह है कि समुद्र से उठने वाले हाई टाइड के जिस पानी को दलदली इलाके का वन क्षेत्र सोख लेता था, उसका करीब 70 फीसदी इलाकों को समाप्त किया जा चुका है। भले ही हमने समुद्र के इलाके को छीनकर मुंबई की भूमि को विस्तार दे दिया हो मगर उस जमीन को हासिल करने को समुद्र प्रतिशोध लेता नजर आता है। जब हाई टाइड का पानी मुंबई में घुस जाता है, तब तेज बारिश व समुद्र का पानी मुंबई पर कहर बरपाते हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतान पड़ता है। 

भारत ही नहीं, एशिया में सबसे समृद्ध महानगर पालिकाओं में गिनी जाने वाली बीएमसी पर काबिज होने की होड़ राजनीतिक दलों में हमेशा रहती है। जिस महानगरपालिका का सालाना बजट 30 हजार करोड़ से अधिक हो, तो यह होड़ स्वाभाविक है। मगर विडंबना यह है कि सारे साल जल निकासी के लिए दूरगामी तो दूर सामान्य उपक्रम तक नहीं किए जाते। जो तंत्र की काहिली को ही उजागर करते है।

पिछले सात दिनों में बारिश का पानी इतना बरसा है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सालभर में बरसता है। चिंता की बात यह है कि मौसम की भविष्यवाणी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट चेता रही है कि अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। इस दौरान हर दिन दो सौ मिलीमीटर या अधिक बारिश हो सकती है। दरअसल मुंबई के ऊपर बादल स्थाई तौर पर जमे हैं। ऐसा सामान्य तौर पर नहीं होता। ऐसे में नीति नियंताओं से पूछा जाना चाहिए कि पानी-पानी होती मुंबई की इस दुर्दशा का असली जिम्मेदार कौन है। देश की आर्थिक राजधानी का ये हाल है तो देश के दूरदराज के इलाकों व अन्य शहरों का क्या हाल होगा, अनुमान लगाना कठिन नहीं है।



 

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