ओडिशा, आंध्र और अरुणाचल विधानसभा चुनावों के नतीजे

Samachar Jagat | Monday, 27 May 2019 03:49:51 PM
Results of Odisha, Andhra and Arunachal assembly elections

17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों के साथ-साथ तीन राज्यों ओडिशा, आंध्रप्रदेश और अरुणाचल प्रदेश की विधानसभाओं के लिए भी मतदान हुआ। हालांकि इन राज्यों में विधानसभा चुनावों पर राष्ट्रीय स्तर पर चले प्रचार अभियानों की छाया मौजूद रही, लेकिन वोट पड़ने की प्रकृति में थोड़ी भिन्न्ता रही।

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शायद यही वजह रही कि ओडिशा में जहां लोकसभा सीटों के लिए पड़े वोटों में भारतीय जनता पार्टी को खासी कामयाबी मिली, वही विधानसभा में बीजू जनता दल (बीजद) ने अपनी पकड़ बनाए रखी। मगर आंध्रप्रदेश में मुख्य टक्कर दो स्थानीय दलों में रही। वहां वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने तेलुगू देशम के मुकाबले काफी अच्छी बढ़त बनाई। मगर अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा दोनों में एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की। दरअसल, कई बार चुनावों के नतीजे इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि वहां के मतदाताओं के सामने मुद्दे कौन से और किस तरह रखे गए हैं। 

ओडिशा में विधानसभा और लोकसभा के लिए मतदाताओं के वोट लेने के लिए स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच टकराव रहा। मसलन अपराधों के मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा भाजपा और बीजद दोनों ने दिया। पर मतदाता शायद किसी ऊहापोह में नहीं पड़े। वहां नवीन पटनायक की सरकार ने अपने कामकाज को मुख्य मुद्दा बनाया और इसने मतदाताओं को प्रभावित किया। लोगों के बीजद को ही फिर से सत्ता सौंपने का फैसला किया। वही आंध्रप्रदेश की लोकसभा और विधानसभा के लिए हुए चुनावों में प्रथम दृष्टया ही सत्ता विरोधी लहर दिखी थी। 

प्रचार के दौरान जाति और भ्रष्टाचार भी प्रमुख मुद्दे के रूप में काम करते दिखे। लेकिन इन सबके बीच एक अहम तथ्य है कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता जगनमोहन रेड्डी ने पिछले तीन सालों में जमीनी स्तर पर काफी मेहनत की थी। शायद इसी का असर चुनाव परिणामों पर साफ दिखा और उन्होंने न केवल विधानसभा बल्कि लोकसभा सीटों पर भी तेलुगू देशम को काफी पीछे छोड़ दिया। 

इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश में पहले ही इस बात के संकेत मिल गए थे कि स्थानीय बनाम बाहरी एक मुख्य मुद्दा होगा। इस मसले पर वहां की भाजपा सरकार ने लोगों के रुख को देखते हुए अपने फैसले भी बदले और शायद इसी का फायदा उसे चुनावों में स्पष्ट रूप से मिला। जाहिर है, इन तीनों राज्यों के मतदाताओं के सामने मुद्दे इस तरह के थे कि उसमें उनके उलझने और भ्रमित होने की गुंजाइश थी। लेकिन उन्होंने राज्य और देश की सरकार चुनने के लिए अपने पैमाने का इस्तेमाल किया और जहां के लिए जो जरूरी लगा, उसे वोट दिया। कहा जा सकता है कि तीनों राज्यों की विधानसभा चुनावों के नतीजों ने मिलाजुला असर सामने रखा। 
 



 

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