जीवन से प्रेम करने वाले करते हैं कुछ अलग

Samachar Jagat | Saturday, 11 Aug 2018 11:54:45 AM
Those who love life are different

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

घर की बातों को, घर में सम्भाल कर रखो
रहती हैं खुली खिड़कियां, इन पर पर्दा डाल कर रखो
रिश्तों के चेहरे एक दर्पण में झांकते रहें
हाथ मिले या ना मिले दिल मिलाकर रखो

यह कहा जाता है कि जीवन है तो सब कुछ है अर्थात् आशा है निराशा है, दिन है रात है, सुबह है शाम है, रिश्ते हैं नाते हैं, गमी है खुशी है, परिवार है संसार है, मकान है दुकान है, सफलता है असफलता है, क्रोध है-शोध है और प्रतिशोध है, ऊंच है-नीच है, छोटा है बड़ा है, पद है-मद है और भी न जाने क्या-क्या है। अर्थात् दुनिया की तमाम चीजें, रिश्ते, आविष्कार और सम्पूर्ण प्रकृति मनुष्य के लिए तभी सार्थक है जब उसका जीवन अस्तित्व में है जब वह भौतिक रूप से साकार है। दुनिया की समस्त चीजें व्यक्ति के जीवन के साथ जुड़ी है।

इसलिए यह जीवन कितना महत्वपूर्ण है, यह कल्पना से परे की बात है। इस जीवन से यही निकलकर आता है कि जीवन में सब कुछ व्यक्ति के अनुसार नहीं होता है, उसकी इच्छा के अनुसार नहीं होता है, वह चाहता कुछ है और हो कुछ जाता है किसी शायर की ये पंक्तियां यहां कितनी सार्थक बैठती हैं व्यक्ति के विविधतापूर्ण जीवन को परिभाषित करने के लिए:-

इन राहों पर चलते-चलते
ऐसा कुछ हो जाता है
मन चाहा खो जाता है
और अनचाहा मिल जाता है

यदि कोई अपने जीवन को सार्थक करना चाहता है तो उसे कटुता को भुलाना होगा, नफरत को छोड़ना होगा, निराशा से दूर रहना होगा, नकारात्मकता को तो पास में ही नहीं फटकने देना होगा, दुर्बलताओं से नाता तोड़ना होगा और सुंदर जीवन जीने के लिए, प्यारा जीवन जीने के लिए और महान जीवन जीने के लिए महानता दिखानी होगी, बड़प्पन दिखाना होगा, दिल को बहुत बड़ा बनाना होगा। आंखें अच्छाइयों को देखने के लिए दी है श्रीप्रभु ने, कान अच्छी बातों-सकारात्मक बातों को सुनने के लिए है, हाथ सद्कर्म करने के लिए दिए हैं, मन-मस्तिष्क सब कुछ अच्छा सोचने और करने के लिए हैं और इस प्रकृति को देखिए यह कितनी खुश और आनंद से भरी रहती है, हमेशा हर हाल में मुस्कुराती रहती है झुमती-नाचती-गाती रहती है, खिलती-महकती-चमकती रहती है और सभी पर प्रेम की वर्षा करती रहती है बिना किसी प्रकार को भेदभाव किए।

तो आइए, अपने इस अनमोल जीवन को प्रेम से भर लें, स्नेहमय बना लें और बना लें सरस-मधुर-शीतल और सार्थक। क्योंकि जिसने भी अपने जीवन को पूरी तरह से प्रेम से भर लिया, वह औरों से अलग बनता गया, अलग करता गया, विशेष करता गया और विशेष बनता गया। नकारात्मकता उसके आसपास भी नहीं रहती और इसी कारण अर्थात् प्रेम के कारण वह सर्वप्रिय बनता चला जाता है। क्योंकि प्रेम ही ईश्वर है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
इन आंखों में प्रेम भरा है
नफरत के शोलों की खातिर
दहक रहे जो बन अंगारे
प्रेम उन्हीं पर बरसा देना।

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures


 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...


Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.