Gupta Navratri 2026: जाने आज या कल कब से शुरू हो रहे गुप्त नवरात्रि, इस विधि के साथ करें घट स्थापना

Shivkishore | Tuesday, 14 Jul 2026 10:56:41 AM
Gupta Navratri 2026: Find out whether Gupta Navratri begins today or tomorrow, and perform Ghat Sthapana using this method.

इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना गया है। वैसे तो आमतौर पर लोग साल में आने वाली दो मुख्य नवरात्रियों, चैत्र और शारदीय नवरात्रि ही मानते है। लेकिन इनके अलावा साल में दो गुप्त नवरात्रि भी आती हैं, इसमें से एक है आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि, जो कल से शुरू होने जा रही है। गुप्त नवरात्रि में माता दुर्गा के सामान्य रूपों की बजाय दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना की जाती है। तांत्रिक सिद्धियों, मंत्र जाप और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह समय अचूक माना जाता है। आइए जानते हैं इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की सही तारीख, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है। 

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 15 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पहला दिन 15 जुलाई 2026, बुधवार से माना जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु कलश स्थापना कर नौ दिनों तक मां भगवती की पूजा-अर्चना करेंगे।

क्या है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व?
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व सामान्य नवरात्रि से कुछ अलग माना जाता है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की आराधना करने से साधक को विशेष आध्यात्मिक शक्ति और देवी कृपा प्राप्त होती है।

गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें घटस्थापना
15 जुलाई की सुबह स्नान करके साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें, पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और वहां लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मिट्टी की एक चौड़ी थाली या पात्र में जौ बोएं, इन्हीं जौ के बीच तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें, कलश में गंगाजल और साफ जल भरें, इसमें सुपारी, अक्षत, लौंग, इलायची, सिक्का और थोड़ी-सी दूर्वा डालें, कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते रखें और उसके ऊपर लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल स्थापित करें। नारियल पर मौली बांधना शुभ माना जाता है, इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करें, दीपक जलाएं और कलश की पूजा करें। देवी को लाल फूल, रोली, अक्षत, चंदन, चुनरी और फल अर्पित करें, आखिर में दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें।

pc- jagran
 



 


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