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सोना और चांदी के पारंपरिक निवेश विकल्पों से हटकर अब निवेशकों की नजरें कॉपर पर टिकने लगी हैं। साल 2025 में शानदार तेजी दिखाने के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी कॉपर निवेशकों को मजबूत रिटर्न दे सकता है। इसकी मुख्य वजहें हैं—कम सप्लाई, बढ़ती वैश्विक मांग और इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ा लंबा स्ट्रक्चरल ट्रेंड।
2025 में कॉपर ने दिए दमदार रिटर्न
साल 2025 में कॉपर की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉपर करीब 13,000 डॉलर प्रति टन तक चढ़ गया। अमेरिका के कॉमेक्स एक्सचेंज पर 6 जनवरी 2026 को कॉपर की स्पॉट कीमत 6.09 डॉलर प्रति पाउंड तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यही भाव करीब 3.80 डॉलर प्रति पाउंड था।
हालांकि 9 जनवरी को थोड़ी नरमी के साथ कॉपर 5.84 डॉलर प्रति पाउंड पर कारोबार करता दिखा, लेकिन सालाना आधार पर इसने करीब 60 फीसदी का रिटर्न दिया।
भारतीय बाजार में भी कॉपर ने इसी तरह मजबूती दिखाई। एमसीएक्स पर 29 दिसंबर को कॉपर फ्यूचर्स ₹1,392.95 प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गए थे। 9 जनवरी को भाव कुछ गिरकर ₹1,278.95 प्रति किलोग्राम पर आ गए।
क्यों तेजी से बढ़ रही है कॉपर की मांग
कॉपर का इस्तेमाल वायरिंग, केबल्स, कंस्ट्रक्शन, पावर सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग जैसी कई इंडस्ट्रीज में होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनियाभर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बढ़ता इस्तेमाल कॉपर की मांग को तेज़ी से बढ़ा रहा है।
इसके अलावा, डेटा सेंटर्स, क्लाउड टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से भी कॉपर की खपत में इजाफा हुआ है। घरों और उद्योगों में बिजली की बढ़ती जरूरत भी इस धातु की मांग को सपोर्ट कर रही है।
सप्लाई कम, इसलिए कीमतों पर दबाव
जहां एक ओर मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कॉपर की सप्लाई सीमित बनी हुई है। माइनिंग से जुड़ी दिक्कतें, नई परियोजनाओं में देरी और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण सप्लाई तेजी से नहीं बढ़ पा रही।
मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने करीब 6 लाख टन अतिरिक्त कॉपर की खरीद की है, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में वैश्विक बाजार में करीब 1.5 लाख टन की कमी रह सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इनवेंट्री का दबाव बना रहा तो शॉर्ट टर्म में कॉपर की कीमतों में मजबूती जारी रह सकती है। मीडियम टर्म में कीमतें नई सप्लाई की उपलब्धता पर निर्भर करेंगी।
कॉपर में निवेश के क्या हैं विकल्प?
भारत में फिलहाल कॉपर से जुड़े ईटीएफ या म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, रिटेल निवेशकों के लिए कॉपर बार या कॉइन जैसे फिजिकल प्रोडक्ट्स भी आमतौर पर नहीं मिलते।
ऐसे में कॉपर में निवेश का मुख्य तरीका कमोडिटी डेरिवेटिव्स ही है। एमसीएक्स पर कॉपर फ्यूचर्स में ट्रेडिंग की जा सकती है, लेकिन इसका लॉट साइज 2.5 टन होने के कारण इसमें बड़ा निवेश करना पड़ता है।
समझदारी और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी
फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मार्जिन मनी से निवेश संभव है, लेकिन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव इसे जोखिम भरा बनाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल वही निवेशक इसमें उतरें, जिन्हें कमोडिटी मार्केट और रिस्क मैनेजमेंट की अच्छी समझ हो।
कुल मिलाकर, कॉपर में लंबी अवधि के लिए कमाई की संभावना नजर आती है, लेकिन मौजूदा हालात में यह निवेश विकल्प अनुभवी निवेशकों के लिए ही ज्यादा उपयुक्त माना जा रहा है।