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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशाके गहलोत 'इंतजारशास्त्र चैप्टर के माध्यम से लगतार प्रदेश की भजनलाल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। आज उन्होंने 'इंतजारशास्त्र: चैप्टर 12 के माध्यम से दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की तर्ज पर निर्मित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरा है।
अशोक गहलोत ने आज इस संबंध में एक्स के माध्सम से कहा कि दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की तर्ज पर निर्मित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल, कॉफी शॉप, जिम, रेस्टोरेंट और गेस्ट रूम जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि प्रदेश के बुद्धिजीवी, लेखक और जनप्रतिनिधि एक साझा मंच पर लोकतांत्रिक संवाद कर सकें। मगर अफसोस, भाजपा सरकार की 'बदला लेने की राजनीति' ने इसे उपेक्षा का शिकार बना दिया है।
कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान को लेकर गहलोत ने प्रदेश की भजनलाल सरकार से तीन सवाल किए हैं। गहलोत ने सरकार से सवाल किया कि निर्माण पूर्ण होने के बाद भी इसे साल भर तक बंद क्यों रखा गया? अब खोलने के बाद भी पारदर्शी सदस्यता प्रक्रिया लागू क्यों नहीं की जा रही? क्या भाजपा सरकार लोकतांत्रिक चर्चा और संवाद से घबरा रही है? जनता के संसाधनों की इस तरह बर्बादी और नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार जवाब दे।
गांधी वाटिका की अनदेखी पर सरकार की नीयत साफ नहीं
इससे पहले अशोक गहलोत ने इंतज़ारशास्त्र : चैप्टर-11 क तहत गांधी वाटिका को लेकर सरकार का घेरा था। उन्होंने कहा था कि गांधी वाटिका की अनदेखी पर सरकार की नीयत साफ नहीं है। भाजपा ने हमारे दबाव में म्यूज़ियम का ताला तो खोल दिया, लेकिन आज इसकी घोर उपेक्षा की जा रही है। क्या भाजपा महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के विचारों से इतनी भयभीत है कि वह इसे युवा पीढ़ी तक पहुँचने से रोकना चाहती है?
PC: deccanherald
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