West Bengal की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदू पुजारियों के लिए आर्थिक सहायता, आवास की घोषणा की

Samachar Jagat | Tuesday, 15 Sep 2020 09:30:02 AM
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee announces financial assistance, housing for Hindu priests

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को राज्य के 8,००० से अधिक हिंदू पुजारियों के लिए 1,००० रुपये मासिक वित्तीय सहायता और मुफ्त आवास की घोषणा की। बनर्जी ने यह घोषणा राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले की है जिसके अगले वर्ष अप्रैल-मई में होने की संभावना है। बनर्जी पर विपक्ष अक्सर ''अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण’’ का आरोप लगाता है।

राज्य के हिंदी भाषी और आदिवासी मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने एक हिदी अकादमी और एक दलित साहित्य अकादमी स्थापित करने का निर्णय किया है। उन्होंने यह घोषणा हिंदी दिवस के दिन की जो हिंदी को देश की आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाने की याद में प्रतिवर्ष इस दिन मनाया जाता है। विपक्षी दलों ने इन घोषणाओं को ''चुनावी हथकंडा’’ करार दिया।

बनर्जी ने कहा, ''हमने पहले सनातन ब्राह्मण संप्रदाय को कोलाघाट में एक अकादमी स्थापित करने के लिए भूमि प्रदान की थी। इस संप्रदाय के कई पुजारी आर्थिक रूप से कमजोर हैं। हमने उन्हें प्रतिमाह 1,००० रुपये का भत्ता प्रदान करने और राज्य सरकार की आवासीय योजना के तहत मुफ्त आवास प्रदान करके उनकी मदद करने का फैसला किया है।’’

उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मैं आप सभी से अनुरोध करती हूं कि इस घोषणा का अन्य कोई मतलब नहीं निकालें। यह ब्राह्मण पुजारियों की मदद करने के लिए किया जा रहा है। उन्हें अगले महीने से भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा क्योंकि यह दुर्गा पूजा का समय है।’’ यह घोषणाएं भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा द्बारा यह आरोप लगाने के एक सप्ताह के भीतर आयी है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल क ांग्रेस सरकार की मानसिकता ''हिदू विरोधी’’ है और वह ''अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’’ नीति अपना रही है।

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भी राज्य सरकार पर ''अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण’’ का आरोप लगाया है। 2०11 में तृणमूल क ांग्रेस को सत्ता में आने के बाद तब आलोचना का सामना करना पड़ा था जब उसने इमामों के लिए मासिक भत्ते की घोषणा की थी। राज्य सरकार ने तब कहा था कि यह पश्चिम बंगाल के वक्फ बोर्ड द्बारा प्रदान किया जाएगा।

हिंदी भाषी लोगों और राज्य के आदिवासी क्षेत्रों के बीच भाजपा के समर्थन के आधार पर सेंध लगाने के प्रयास के तहत राज्य सरकार ने एक हिदी अकादमी और एक दलित साहित्य अकादमी के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, ''हमने पहले सत्ता में आने के बाद एक हिदी अकादमी का गठन किया था। आज हमने इसका पुनर्गठन करके एक नई हिदी अकादमी बनाने का फैसला किया है जिसके अध्यक्ष पूर्व (तृणमूल क ांग्रेस) राज्यसभा सदस्य विवेक गुप्ता होंगे। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं और भाषायी आधार पर कोई पूर्वाग्रह नहीं है।’’

गुप्ता कोलकाता से प्रकाशित एक हिदी दैनिक के संपादक भी हैं। बनर्जी ने साथ ही अकादमी के 25 सदस्यीय बोर्ड की भी घोषणा की। उन्होंने राज्य के आदिवासी मतदाताओं तक भी पहुंच बनाने का प्रयास किया जिसमें से एक बड़े वर्ग ने 2०19 के लोकसभा चुनाव में जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। इसमें झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुरा और पुरुलिया जिले आते हैं।

उन्होंने कहा, ''आदिवासियों की भाषाओं की बेहतरी के लिए हमने एक दलित साहित्य अकादमी का गठन करने का फैसला किया है। दलितों की भाषा का बंगाली भाषा पर प्रभाव है।’’ विपक्षी भाजपा और माकपा ने राज्य सरकार के हिदू पुजारियों को भत्ते और एक हिदी अकादमी के गठन के निर्णय की आलोचना की और दावा किया कि यह सब ''चुनावी हथकंडा’’ है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा, ''वह इन सभी वर्षों तक क्या कर रही थीं? उन्होंने इमामों के लिए इसी तरह की सहायता की घोषणा करने पर इस भत्ते की घोषणा क्यों नहीं की? यह और कुछ नहीं बल्कि एक चुनावी हथकंडा है। जहां तक हिदी अकादमी का सवाल है तो वह तृणमूल क ांग्रेस थी जिसने हिदी भाषी लोगों को बाहरी कहा था।’’

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर चौधरी ने कहा कि घोषणा तृणमूल कांग्रेस सरकार की हताशा को दर्शाती है। चौधरी ने दावा किया, ''मुख्यमंत्री ने महसूस किया है कि केवल अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण से काम नहीं चलेगा। इसलिए, उन्होंने हिदू पुजारियों को सहायता देने का फैसला किया है। यह एक चुनावी हथकंडा है। हिदू या मुस्लिमों के विकास में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।’’ माकपा की केंद्रीय समिति सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि इस तरह की राजनीति राज्य में सांप्रदायिक विभाजन को और गहरा करेगी। (एजेंसी)



 
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