राष्ट्रपति चुनाव परिणाम : Trump की टीम की ओर से दायर मुकदमों पर एक नजर

Samachar Jagat | Thursday, 19 Nov 2020 08:30:02 PM
Presidential election results: a look at the lawsuits filed by Trump's team

वाशिगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में धांधली होने का लगातार आरोप लगा रहे हैं लेकिन बिना किसी साक्ष्य के उनकी कानूनी टीम को इस संबंध में कहीं कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावों में धांधली नहीं हुई है।

कानूनी तौर पर कोई सफलता हाथ नहीं लगने के बावजूद ट्रंप और उनके रिपब्लिकन सहयोगी उन राज्यों में चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी होने से रोकने या प्रक्रिया में देरी का प्रयास कर रहे हैं जिन राज्यों में, देश के अगले राष्ट्रपति के रूप में हाल ही में निर्वाचित जो. बाइडन को सफलता मिली है। रिपब्लिकन पार्टी की शिकायत है कि अन्य धांधलियों के अलावा उनके पर्यवेक्षकों को वोटों की गिनती प्रक्रिया की ठीक से निगरानी तक नहीं करने दी गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के पास चुनाव परिणाम को बदलने या अपने पक्ष में करने का कोई विकल्प नहीं है। लेकिन उनके द्बारा चुनावों में धांधली को लेकर बार-बार किये जा रहे आधारहीन दावे ना सिर्फ चुनावी प्रक्रिया में लोगों के भरोसे को कमजोर बना रहे हैं बल्क उनके (ट्रंप) समर्थकों के मन में यह भाव पैदा कर रहे हैं कि बाइडन अवैध राष्ट्रपति हैं।

रिपब्लिकन पार्टी ने जिन छह राज्यों में चुनाव परिणाम को चुनौती दी है वे हैं... एरिजोना, जॉर्जिया, मिशिगन, नेवाडा, पेन्सिलवेनिया और विस्कॉन्सिन।
एरिजोना--
मामला-- एरिजोना रिपब्लिकन पार्टी, प्रांत की सबसे ज्यादा आबादी वाली काउंटी मारीकोपा में उस वक्त तक चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी होने से रोकना चाहती है, जब तक कुछ वोटों की फिर से गिनती करने की उसकी अर्जी पर अदालत का फैसला नहीं आ जाता। अधिकारियों ने बताया कि काउंटी के अधिकारियों द्बारा मतगणना की ऑडिट पूरी कर ली गई है और कहीं कोई दिक्कत नहीं है।

क्या हुआ-- जज ने अभी तक फैसला नहीं सुनाया है। मामले की सुनवाई बुधवार को होनी है।
एक अन्य मामले में ट्रंप की प्रचार टीम और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी ने मारीकोपा काउंटी के चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी करने में देरी का अनुरोध किया है। लेकिन ट्रंप के वकीलों के यह स्वीकार करने के बाद जज ने 13 नवंबर को अर्जी खारिज कर दी कि कुछ वोटों की दोबारा गिनती होने से एरिजोना के चुनाव परिणाम पर असर नहीं होगा।

जॉर्जिया--
मामला-- हाई-प्रोफाइल कंजरवेटिव वकील एल. लिन वुड जूनियर ने जॉर्जिया में चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी करने में देरी का अनुरोध करते हुए मुकदमा दायर किया है। वुड का आरोप है कि जॉर्जिया ने गैर कानूनी तरीके से अनुपस्थित मतपत्रों की गिनती की प्रक्रिया बदल दी। वुड के मुकदमे का लक्ष्य इस साल की शुरुआत में हुए एक कानूनी समझौते से जुड़ा है जिसमें अनुपस्थित मतदाताओं के मतपत्रों पर हस्ताक्षर के सत्यापन की राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया नहीं होने का मामला उठाया गया है। जॉर्जिया के 'डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट’ ने वुड के मामले को 'बचकाना और आधारहीन दावा’ बताया है।
क्या हुआ-- जज ने प्रमाणपत्र जारी करने पर अस्थाई रोक लगाने के अनुरोध से जुड़े मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को तय की है।

मिशिगन--
मामला-- ट्रंप की चुनाव प्रचार टीम चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी होने से रोकना चाहती है। उसका आरोप है कि अधिकारियों ने ''चुनाव 2०2० में धांधली और भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगाई।’’
ट्रंप की कानूनी टीम का दावा है कि उनके पर्यवेक्षकों को वोटों की गिनती ठीक से देखने से रोका गया, अमान्य वोटों की गिनती की गई और जिन वोटों को नजरअंदाज किया गया, रिपब्लिकन उसे चुनौती देते हैं।
चुनाव को चुनौती देने वाले दो अन्य लोगों की ओर से इस सप्ताह अदालत में दी गई अर्जी में अनुरोध किया गया है कि 'चुनाव की प्रमाणिकता साबित’ करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट पूरा होने तक चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी ना किया जाए।
क्या हुआ-- दोनों में से किसी मामले में कोई फैसला नहीं आया है। डेट्रॉयट में जजों ने चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी होने से रोकने के रिपब्लिकन पार्टी के कई प्रयासों को खारिज कर दिया है। रिपब्लिकन द्बारा अवरोध लगाए जाने के कुछ घंटों बाद ही वायने काउंटी (सीट का नाम डेट्रॉयट) ने मंगलवार को आम सहमति से अपने चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी कर दिया।

नेवाडा--
मामला-- ट्रंप की प्रचार टीम जज से नेवाडा के चुनाव परिणाम को रद्द करने या फिर उन्हें दरकिनार करते हुए ट्रंप को वहां से विजेता घोषित करने की मांग कर रही है। उनकी दलील है कि गैरकानूनी और फर्जी तरीके से वोट डाले गए हैं और डाक मतपत्रों पर हस्ताक्षर सत्यापन के लिए ऑप्टिकल स्कैनिग करना कानून का उल्लंघन है।
ट्रंप की ओर से मंगलवार को दी गई अर्जी में उन्हीं दलीलों को दोहराया गया है जिन्हें नेवाडा और अन्य जगहों पर जज खारिज कर चुके हैं। अर्जी में दावा किया गया है कि मर चुके लोगों के नाम पर भी वोट डाले गए हैं, चुनाव पर्यवेक्षकों को प्रक्रिया के मुख्य हिस्सों को देखने नहीं दिया गया और अमेरिकी-भारतीय क्षेत्रों के लोगों को अवैध तरीके से वोट डालने दिया गया।
इस सप्ताह अदालत में दी गई एक अन्य अर्जी में पूर्व कंजरवेटिव सांसद के नेतृत्व में एक चुनाव निगरानी संस्था ने पूरे राज्य में चुनाव प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया स्थगित करने को कहा है।
क्या हुआ-- किसी भी मामले में अभी तक कोई फैसला नहीं आया है।

पेन्सिलवेनिया--
मामला-- ट्रंप की प्रचार टीम का लक्ष्य यहां भी चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी होने से रोकना है। उनका आरोप है कि फिलाडेल्फिया और छह अन्य काउंटी ने गलत तरीके से मतदाताओं को डाक वोटों में हुई गलती को सुधारने का अवसर दिया, ऐसा नहीं होने की स्थिति में वे वोट तकनीकी आधार पर अमान्य घोषित कर दिए जाते। मतदाताओं ने गोपनीय लिफाफ़े का उपयोग नहीं करना या हस्ताक्षर में दिक्कत जैसी गलतियां की थीं, जिन्हें सुधारने का मौका दिया गया।
क्या हुआ-- अन्य लोगों ने इस मामले से अचानक अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद ट्रंप के व्यक्तिगत वकील रुडी गुईलियानी ने मामले को अपने हाथ में लिया है। न्यूयॉर्क शहर के पूर्व मेयर गुईलियानी 199० की दशक के बाद पहली बार अदालत में किसी मुकदमे की पैरवी करेंगे। वकील ने बिना किसी साक्ष्य के डेमोक्रेटिक पार्टी पर देश भर में चुनावी धांधली का आरोप लगाया है। जज ने इसपर तत्काल कोई फैसला नहीं सुनाया है और इस मामले में बृहस्पतिवार को होने वाली सुनवाई को रद्द कर दिया है। हालांकि उन्होंने दोनों पक्षों को इस सप्ताह अपनी-अपनी दलील पेश करने का समय भी दिया है।

विस्कान्सिन--
मामला-- ट्रंप की प्रचार टीम ने बुधवार को एक अर्जी दे कर डेमोक्रेटिक पार्टी के गढ़ मिलवाउकी और मैडिसन काउंटी में वोटों की फिर से गिनती कराने का अनुरोध किया है। उसने बिना किसी साक्ष्य के आरोप लगाया है कि अनुपस्थित मतदाताओं के वोटों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया या फिर ऐसे वोट डाले गए और सरकारी कर्मचारियों ने कानून का उल्लंघन किया।
क्या हुआ-- बाइडन राज्य में ट्रंप से 2०,००० वोटों से जीते। ट्रंप के अनुरोध पर वोटों की दोबारा गिनती शुक्रवार से शुरू होगी और एक दिसंबर को समाप्त होगी। एक दिसंबर तक राज्यों के स्तर पर चुनाव परिणाम प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जानी है। (एजेंसी)   



 
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