- SHARE
-
इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। वह एच-1बी वीजा के लिए लगाए गए 100,000 डॉलर के शुल्क को लेकर परेशानी में घिरते नजर आ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप सरकार की ओर से लगाए गए इस शुल्क के खिलाफ अमेरिका के 20 राज्य खड़े हो गए हैं। इन राज्यों ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार को चेतावनी देते हुए बोल दी कि इस कदम से देशभर के स्कूलों और अस्पतालों का कामकाज बाधित होगा और कुशल प्रतिभाओं के अमेरिका आने में रुकावट आएगी। खबरों के अनुसार, ग्लोबल नर्स फोर्स, एट अल. बनाम ट्रंप मामले में वादियों का समर्थन करते हुए बहु-राज्यीय एमिकस ब्रीफ में कैलिफोर्निया के जिला न्यायालय से इस नीति को रोकने के लिए प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी करने का आग्रह किया है।
एच-1बी वीजा के लिए लगाए गए 100,000 डॉलर के शुल्क को गैरकानूनी और जनहित के विपरीत बताया गया है। तर्क दिया गया है कि इससे श्रमिकों की कमी होगी, अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं बाधित होंगी। वहीं सार्वजनिक नियोक्ताओं को इस कार्यक्रम से प्रभावी रूप से बाहर कर देगा। राज्यों ने भी कहा कि देश में शिक्षकों की कमी है, 74 प्रतिशत स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने 2024-2025 शैक्षणिक सत्र में रिक्त पदों को भरने में कठिनाई जताई है।
शिक्षक तीसरा सबसे बड़ा व्यावसायिक समूह
खबरों के अनुसार, अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों में शिक्षक तीसरा सबसे बड़ा व्यावसायिक समूह हैं, जिनमें 30 हजार लोग इस वीजा पर देश में काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 1000 कॉलेज और विश्वविद्यालय शिक्षण और अनुसंधान में सहायता के लिए एच-1बी कर्मियों पर निर्भर हैं।
PC: moneycontrol
अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें