Travel Tips : हनुमानजी के इस रूप में दर्शन आपको कहीं देखने को नहीं मिलेंगे..! तिरुपति घूम आए हैं तो अब बनाएं सालासर बालाजी का प्लान, ऐसे पहुंचे सालासर बालाजी मंदिर?

Samachar Jagat | Wednesday, 24 Mar 2021 03:19:05 PM
Travel Tips: You will not get to see Hanumanji in this form ..! If you are visiting Tirupati, then plan to Salasar Balaji's mandir, how Salasar Balaji temple arrived?

लाइफस्टाइल डेस्क। अगर आप हनुमानजी के भक्त हैं और घूमने के शौकीन हैं तो सालासर बालाजी मंदिर के दर्शन करना मत भूलिएगा। यह मंदिर राजस्थान के चुरू जिले में स्थित है। सालासर बालाजी पवन पुत्र हनुमान का पवित्र धाम है। कहने को तो भारत देश में हनुमानजी के कई मंदिर हैं, लेकिन हनुमानजी के इस मंदिर की उनके भक्तों के बीच बहुत मान्यता है। यही वजह है कि यहां हर साल 6 से 7 लाख हनुमान भक्त उनके दर्शन के लिए जुटते हैं।

भारत में दो बालाजी मंदिर मशहूर हैं। एक तो आंध्रप्रदेश में स्थित तिरूपति बालाजी मंदिर और दूसरा राजस्थान में स्थित सालासर बालाजी का मंदिर। भारत में हनुमानजी का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां हनुमानजी गोल चेहरे के साथ दाढ़ी और मूछों में दिखते हैं। हालांकि इसके पीछे भी बड़ी रोचक कथा बताई जाती है। अगर आप इस धाम में जा रहे हैं, तो आपके रूकने से लेकर खाने-पीने तक की पूरी व्यवस्था है। यहां ठहरने के लिए कई ट्रस्ट और धर्मशालाएं बनी हुई हैं। हर साल चैत्र पूर्णिमा और आश्विन पूर्णिमा पर भव्य मेले का आयोजन यहां होता है, इन मौकों पर छोटा सा सालासर शहर किसी महाकुंभ जैसा दिखता है।

घटना 1754 की है जब नागपुर जिले में असोटा गांव में एक जाट किसान अपना खेत जोत रहा था। तभी उसका हल किसी नुकीली पथरीली चीज से टकराया। उसने खोदा तो देखा कि यहां एक पत्थर था। उसने पत्थर को अपने अंगोछे से साफ किया तो देखा कि पत्थर पर बालाजी भगवान की छवि बनी है। उसी समय जाट की पत्नी खाना लेकर आई, तो उसने भी मूर्ति को अपनी साड़ी से साफ किया और दोनों दंपत्ति ने पत्थर को साक्षात नमन किया। तब किसान ने बाजरे के चूरमे का पहला भोग बालाजी को लगाया। सालासर बालाजी मंदिर का इतिहास से लेकर अब तक सालासर बालाजी मंदिर में बाजरे के चूरमे का ही भोग लगाया जाता है।

मूर्ति के प्रकट होने की बात पूरे गांव के साथ गांव के ठाकुर तक पहुंच गई। एक रात असोटा के ठाकुर को सपने में बालाजी ने मूर्ति को सालासर ले जाने के लिए कहा। वहीं दूसरी तरफ सपने में हनुमान भक्त सालासर के महाराज मोहनदास को बताया कि जिस बैलगाड़ी से मूर्ति सालासर जाए, उसे कोई रोके नहीं। जहां बैलगाड़ी अपने आप रूक जाए, वहीं उनकी मूर्ति स्थापित कर दी जाए। सपने में मिले इन आदेशों के बाद भगवान सालासर बालाजी की मूर्ति को वर्तमान स्थान पर ही स्थापित कर दिया गया।

दर्शन सुबह 4 बजे से शुरू होते हैं, 10 बजे अंतिम दर्शन

सालासर बालाजी मंदिर भक्तों के लिए सुबह 4 बजे खोल दिया जाता है। यहां मंगल आरती सुबह 5 बजे पुजारियों द्वारा की जाती है। सुबह 10:3 बजे राजभोग आरती होती है। बता दें कि ये आरती केवल मंगलवार के दिन होती है। इसलिए अगर आप इस आरती में शामिल होना चाहते हैं तो मंगलवार के दिन यहां आएं। शाम को 6 बजे धूप और मेाहनदास जी की आरती होती है। इसके बाद 7:30 बजे बालाजी की आरती और 8:15 पर बाल भोग आरती होती है। यहां आप रात के 10 बजे तक दर्शन कर सकते हैं। 10 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं, जो अगले दिन फिर भक्तों के लिए सुबह 4 बजे खुलते हैं। मंदिर में बालाजी की मूर्ति को बाजरे के चूरमे का खास भोग लगाया जाता है।

वीआईपी दर्शन के 1000, लाइन से भी 100 रु. की कटेगी पर्ची

सालासर बालाजी में दर्शन के लिए लंबी लाईन में खड़े होकर तीन घंटे का इंतजार करना पड़ता है। अगर आपको वीआईपी दर्शन करने हैं तो मंदिर के पीछे वाले गेट पर चार से पांच काउंटर हैं, जहां से आप 1000 रूपए की पर्ची ले सकते हैं और बिना किसी लाईन के सीधे दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं। अगर आप 1000 रूपए की पर्ची नहीं ले सकते, तो दूसरा विकल्प है कि आप 100 रूपए वाली पर्ची काउंटर से कटा लें। लेकिन यहां से दर्शन के लिए आपको 20 मिनट का समय लगेगा।

ऐसे पहुंचे सालासर मंदिर ?

सालासर के लिए कोई नियमित उड़ान तो नहीं है, लेकिन इससे कुछ दूरी पर संगानेर एयरपोर्ट है। जहां से सालासर की दूरी करीब 138 किमी है। सांगानेर से सालासर जाने के लिए आपको बस या टैक्सी मिल जाएगी। अगर आप ट्रेन से सालासर बालाजी मंदिर जाना चाहते हैं तो बता दें कि यहां कोई रेलवे स्टेशन भी नहीं है। इसके लिए आपको तालछापर स्टेशन जाना पड़ेगा, जहां से सालासर की दूरी 26 किमी है। जबकि सीकर से इसकी दूरी 24 किमी है और लक्ष्मणगढ़ से ये मंदिर 30 किमी की दूरी पर बसा हुआ है।बस से जयपुर से सालासर बालाजी की दूरी 150 किमी है, जहां पहुंचने के लिए 3.5 घंटे का समय लगता है।

 



 
loading...




Copyright @ 2021 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.