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इंटरनेट डेस्क। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के चार निजी कार्मिकों को हटाए जाने पर केन्द्र सरकार को निशाने पर लिया है। इस संबंध में रमेश ने एक्स के माध्यम से कहा कि मोदी राज में मंत्रियों के निजी स्टाफ में होने वाली सभी प्रमुख नियुक्तियों की जांच और मंजूरी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की जाती है।
अब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के चार करीबी सहयोगियों को लगातार दो दिनों में दो बैच में बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें से एक सहयोगी को संबंधित मंत्री का सबसे करीबी विश्वासपात्र माना जाता है।
रमेश ने इस संबंध में एक्स के माध्यम से कहा कि साफ कि इस महत्वपूर्ण मंत्रालय में शासन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हाल के वर्षों में यह मंत्रालय पर्यावरण और वनों की रक्षा करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के मामले में लगभग पूरी तरह विफल रहा है।
वायु प्रदूषण लगातार जनस्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि इस बीच, देशभर में पारिस्थितिक विनाश लगातार जारी है-जिसमें ग्रेट निकोबार, मध्य और पूर्वी भारत के घने वन क्षेत्र, अरावली पर्वतमाला और जैव विविधता से समृद्ध अन्य पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। वायु प्रदूषण लगातार जनस्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है और जिन मानकों को अपडेट कर सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, वे आज भी नहीं किए जा रहे हैं। समस्याओं की सूची अंतहीन है। लेकिन क्या मोदी शासन को इसकी कोई परवाह भी है? पर्यावरण मंत्रालय अब प्रवचन मंत्रालय बनकर रह गया है। जयराम रमेश की इस पोस्ट को राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी शेयर किया है।
PC: aajtak
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