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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोक सभा में पेश विकसित भारत -रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण विधेयक 2025 को लेकर केन्द्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व सीएम गहलोत ने इस बिल को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि भाजपा सरकार केवल मनरेगा का नाम और इस परियोजना के तौर-तरीके ही नहीं बदल रही बल्कि विकसित भारत का ढोंग कर असल में ग्रामीण भारत की रीढ़ तोड़ने पर तुली है। 'विकसित भारत' के नाम पर छलावा करने से इनकी नीयत सामने आ रही है।
पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार 100% फंडिंग को 60:40 करके राज्यों पर बोझ डाल रही है, जो इस क्रांतिकारी योजना को बंद करने की एक सोची-समझी साजिश है। इस योजना की फंडिंग में कटौती करना यह साबित करता है कि यह सरकार गरीब विरोधी है।
एनडीए सरकार इसे अधिकार नहीं सरकार का 'एहसान' बनाना चाहती है
अशोक गहलोत ने इस बिल को लेकर आगे कहा कि जो योजना दुनिया भर में 'सोशल सिक्योरिटी' का मॉडल बनी, मोदी सरकार उसे ही खत्म कर रही है। यूपीए ने मनरेगा का कानून बनाकर 'काम का अधिकार' दिया था जिसमें कोई भी व्यक्ति काम मांग सकता था एवं काम नहीं मिलने पर वह बेरोजगारी भत्ते का हकदार होता परन्तु ऐसे प्रावधान खत्म कर एनडीए सरकार इसे अधिकार नहीं सरकार का 'एहसान' बनाना चाहती है। आपको बता दें कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की ओर पेश किए गए विकसित भारत -रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण विधेयक 2025 का कांग्रेस की ओर से विरोध किया गया है।
PC: livehindustan
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