केवल सैद्धान्तिक ज्ञान से अवसरों को नहीं भुनाया जा सकता

Samachar Jagat | Tuesday, 04 Jun 2019 02:54:23 PM
Opportunities can not be redeemed only with theoretical knowledge

यह बिल्कुल सही है कि बिना ज्ञान ग्रहण किए कोई जीवन की एक भी सीढ़ी नहीं चढ़ सकता है, बिना किसी सही जानकारी के वह कुछ नहीं कर सकता है, यदि किसी को आगे बढ़ना है तो उसे सीखना होगा, नित नई जानकारियां लेनी होंगी, अपने ज्ञान को बढ़ाना होगा और अपनी समझ को विकसित करना होगा। लेकिन इसके साथ यह भी बहुत जरूरी है कि अपने सीखे हुए ज्ञान को व्यवहार में बदलना होगा, उसे प्रेक्टिकल में उपयोग करना होगा, उससे रूबरू होकर आगे बढ़ना होगा तभी कोई अपने जीवन के अवसरों को भुना सकेगा, आगे बढ़ सकेगा और जीवन को सार्थक कर सकेगा। इसी बात को सार्थक करने के लिए यहां एक इसी से संबंधित प्रसंग दिया जा रहा है। एक आश्रम में कोई संत रहते थे। वे पहुंचे हुए संत थे अर्थात् जीवन के मर्म को अच्छे से जानते थे। उनके साथ एक शिष्य भी रहता था, जिसकी उम्र कम थी। 

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एक दिन शिष्य कहीं से एक पिंजरा लाया और उसमें एक तोते को बंद कर दिया। इस घटना से संतश्री बहुत आहत हुए। संतश्री ने अपने बाल शिष्य से कहा कि इस तोते को इस पिंजरे में कैद मत करो क्योंकि ‘‘परतंत्रता इस दुनिया का सबसे बड़ा अभिशाप है।’’ चूंकि वह शिष्य एक बालक था, इसलिए वह अपनी जिद पर अड़ा रहा।

अब संतश्री ने यह निश्चय किया कि कैसे भी हो तोते को परतंत्रता से मुक्ति तो अवश्य ही मिलनी चाहिए। उन्होंने अब तोते को ही पढ़ाना शुरु कर दिया कि ‘बाहर निकलो, उड़ जाओ।’ यह वाक्य संतश्री दिन में तोते को अनेकों बार सीखाते और इसका असर भी कुछ दिखाई देने लगा। अब तोता अच्छे से बोलने लगा कि बाहर निकालो-उड़ जाओ। लेकिन पिंजरे को गेट हमेशा बंद रहता था, वह कैसे निकल पाता? एक दिन सुबह-सुबह शिष्य उसे कुछ खिला-पिला कर पिंजरे का गेट बंद करना भूल गए। अब तोते के पास अच्छा अवसर था, बाहर निकलने का। उसने ऐसा ही किया तोता पिंजरे से बाहर आ गया और उड़ कर छत पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद में छत पर संतश्री आए और तोता उनको देखकर वापस पिंजरे में चला गया।

अर्थात् उसने केवल उस वाक्य को सैद्धान्तिक रूप से ही रट लिया, उसे व्यावाहारिक जीवन में काम में नहीं लिया। यही बात व्यक्ति के साथ है वह अपने सैद्धान्तिक ज्ञान को तो बढ़ा रहा है अर्थात् वह सुब कुछ जानना चाहता है, लेकिन करना कुछ नहीं चाहता है। ऐसा उसने जो सीखने में समय, बुद्धि और धन लगाया, वह यौं ही बेकार चला जाता है। जो भी सीखें, उसे व्यवहार में अवश्य लाएं, उसे काम में अवश्य लें तभी उस ज्ञान की सार्थकता है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
सीखना तभी सीखना होता
जब वह व्यवहार में होता
जीवन पथ पर बढ़ते जाएं
जीवन निर्माण प्यार में होता।



 

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