- SHARE
-
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों की निगाहें अब यूनियन बजट 2026 पर टिकी हैं। निवेशकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि सरकार इस बार क्रिप्टो टैक्सेशन के नियमों में कुछ राहत दे सकती है। खासतौर पर 1% TDS और 30% फ्लैट टैक्स को लेकर लंबे समय से नाराजगी जताई जा रही है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022 में क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर सख्त टैक्स नियम लागू किए थे। इसके तहत क्रिप्टो से हुए मुनाफे पर 30% टैक्स और हर ट्रांजेक्शन पर 1% TDS लगाया गया था, जो 1 जुलाई 2022 से लागू हुआ।
TDS में कटौती की मांग क्यों?
क्रिप्टो इंडस्ट्री का मानना है कि 1% TDS की वजह से ट्रेडर्स की बड़ी रकम फंस जाती है और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी असर पड़ता है। कई निवेशक इसी कारण ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स का रुख कर चुके हैं।
इंडस्ट्री की मांग है कि:
वजीरएक्स के फाउंडर निश्चल शेट्टी का कहना है कि TDS कम होने से भारत में क्रिप्टो ट्रेडिंग को फिर से गति मिलेगी और कंप्लायंस भी बढ़ेगा।
30% फ्लैट टैक्स बना बड़ी परेशानी
फिलहाल क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30% फ्लैट टैक्स लगता है, चाहे आपने निवेश कुछ दिन रखा हो या कई साल। यह टैक्स दर लॉटरी और जुए जैसी इनकम कैटेगरी में आती है, जिससे लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को खासा नुकसान होता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि:
-
शेयर और म्यूचुअल फंड्स में लॉन्ग टर्म निवेश पर टैक्स में राहत मिलती है
-
लेकिन क्रिप्टो में ऐसी कोई सुविधा नहीं है
-
इससे निवेशकों का रुझान क्रिप्टो से दूर होता जा रहा है
लॉस सेट-ऑफ की भी मांग
क्रिप्टो निवेशकों की एक और बड़ी मांग है कि:
अभी नियम यह है कि VDA से हुए नुकसान को किसी भी दूसरी इनकम से एडजस्ट नहीं किया जा सकता, जिससे निवेशकों को डबल नुकसान झेलना पड़ता है।
सरकार से क्या उम्मीदें हैं?
क्रिप्टो कम्युनिटी चाहती है कि सरकार:
-
टैक्स स्ट्रक्चर को सरल और निवेशक-अनुकूल बनाए
-
ऑफशोर एक्सचेंज की बजाय भारतीय प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा मिले
-
डिजिटल एसेट सेक्टर में ग्रोथ और इनोवेशन को सपोर्ट किया जाए
अगर बजट 2026 में इन मांगों पर सकारात्मक फैसला आता है, तो भारत में क्रिप्टो मार्केट को नई जान मिल सकती है।