स्कूलें बंद करना और रोजगार छीनना भाजपा की नीतिगत परंपरा बन गई: Dotasra

Hanuman | Friday, 20 Mar 2026 09:44:06 AM
Closing schools and snatching away jobs has become a policy tradition of the BJP: Dotasra

जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्कूलों को लेकर एक बार फिर से भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा ने इस संबंध में सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी बात ही है।

उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि भाजपा सरकार राजस्थान में 7 हजार से अधिक स्कूलों बंद और मर्ज करने की तैयारी में है, जो बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। स्कूलें बंद करने के लिए अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है, ये फैसला सीधे-सीधे RTE नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को 1 किलोमीटर में प्राथमिक स्कूल (PS) और कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए 3 किलोमीटर में उच्च प्राथमिक स्कूल (UPS) होना कानूनन बाध्य है।

डोटासरा ने कहा कि स्कूलें बंद करना और रोजगार छीनना भाजपा की नीतिगत परंपरा बन गई है। 2013 से 2018 तक पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने भी मर्ज के नाम पर 20 हज़ार से अधिक स्कूलें बंद की थी। अब वही काम भाजपा की मौजूदा पर्ची सरकार करने जा रही है। शिक्षा विभाग ने 7,352 ऐसी स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई है, जिन प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का नामांकन 0–14 और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का नामांकन 0–24 यानि 25 से कम हैं। भाजपा एक तरफ NEP 2020 का ढोंग रच रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों पर ताले लगाकर बच्चों से शिक्षा का मूल अधिकार छीन रही है। इतना ही नहीं ये कदम 20 हजार से अधिक पद समाप्त कर रोजगार की संभावनाएं खत्म करने वाला होगा।

कांग्रेस नेता डोटासराने कहा कि हकीकत ये है कि प्रदेश में शून्य नामांकन वाली सिर्फ 96 स्कूलें हैं, पिछले 4 साल से सरकारी स्कूलों का नामांकन लगातार घटता जा रहा है। जहां कांग्रेस सरकार में 2021-22 में नामांकन 97 लाख से अधिक था, वो अब 2025-26 में घटकर 73 लाख रह गया है।

शिक्षा मंत्री को शिक्षा से कोई लेना देना नहीं
नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है, ऐसे समय में भाजपा सरकार का दायित्व क्षमता अनुसार पर्याप्त शिक्षक लगाने, नामांकन बढ़ाने, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने का होना चाहिए। लेकिन इसके उलट स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई जा रही है। ये सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि गरीब, ग्रामीण और वंचित बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा है। दुर्भाग्य है कि आज प्रदेश में ऐसे शिक्षा मंत्री हैं, जिन्हें शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है। सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने की बजाय उसे बर्बाद करने और गरीबों के बच्चों की शिक्षा छीनने में लगे हैं।

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