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जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह ने अब राजस्थान राजपत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज में पोलो सर्किल नाम डालने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता डोटासरा ने एक्स के माध्यम से कहा कि जयपुर में 'पोलो सर्किल'... ये कब बना? क्या भाजपा सरकार ने 'अंबेडकर सर्किल' का नाम चुपचाप बदलकर 'पोलो सर्किल' कर दिया? अगर ये सत्य है.. तो फिर कब और किस आदेश व प्रक्रिया के तहत किया गया? क्या जयपुर नगर निगम, जेडीए और यूडीएच विभाग ये बताएंगे कि नया नाम किस नक्शे, अधिसूचना और निर्णय के तहत किया गया? और यदि नाम नहीं बदला गया है, तो फिर राजस्थान राजपत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज में काल्पनिक नाम डालने का दुस्साहस कैसे हुआ?
डोटासरा ने इस संबंध में आगे कहा कि राजपत्र (विशेषांक) में जिस 'पोलो सर्किल' का उल्लेख किया गया है, वो न तो जयपुर की जनता और न ही प्रशासनिक अमले ने कभी ऐसे किसी सर्किल को जाना है। ये मार्ग वर्षों से स्पष्ट रूप से स्टैच्यू सर्किल से अंबेडकर सर्किल से विधानसभा टी-पॉइंट जाना गया है। ऐसे में अचानक 'पोलो सर्किल' कहां से प्रकट हो गया? ये गंभीर और चिंताजनक प्रश्न है।
सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए
डोटासरा ने इस संबंध में आगे कहा कि क्योंकि ये सिर्फ नाम का नहीं, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान का सवाल है। अंबेडकर जैसे महापुरुष के नाम को मिटाने का षड्यंत्र और भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। क्या भाजपा को बाबा साहेब अंबेडकर से इतनी नफरत और असहजता है कि उनके नाम वाले सर्किल को भी कागज़ों से मिटाया जा रहा है? ये किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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