नोटबंदी का उद्देश्य सिर्फ पुराने नोटों को रद्द करना नहीं था : वित्त मंत्री

Samachar Jagat | Friday, 31 Aug 2018 10:15:33 AM
notabandi was not intended to cancel old notes only: Finance Minister

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य सिर्फ लोगों के पास पड़े पुराने नोटों को रद्द करना ही नहीं था बल्कि इसके कई वृहद उद्देश्य थे जिनमें अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाना और कालाधन पर प्रहार भी शामिल है। रिजर्व बैंक की बुधवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद 500 और 1,000 रुपए के बंद किए गए अधिकांश नोट बैंकों में वापस आ गए। 

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मूल्य के आधार पर इनमें से 99.3 प्रतिशत नोट बैंकों के पास वापस आए हैं। इस पर विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में जेटली ने कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य सिर्फ लोगों के पास पड़े नोटों को रद्द करना ही नहीं था बल्कि इसके कई वृहद उद्देश्य थे और नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव हुआ है। अर्थव्यवस्था अधिक औपचारिक बनी है और तंत्र में अधिक धनराशि आई है। राजस्व संग्रह और व्यय बढ़ा है। नोटबंदी की दो तिमाहियों के बाद विकास में भी तेजी आयी। 

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रिपोर्ट सार्वजनिक जारी होने के बाद सरकार पर हमला बोलते हुये कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने नोटबंदी को पूरी तरह से असफल बताया था। वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी वाले नोटों पर दो बार रिपोर्ट जारी किए हैं जिसमें उसने कहा था कि अधिकांश नोट बैंकों में जमा कराए गए हैं। लेकिन, अब यह कहा जा रहा है कि अधिकांश नोट बैंकों में जमा कराए गए जिसके कारण नोटबंदी सफल नहीं रही।

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उन्होंने कहा नोटबंदी का उद्देश्य सिर्फ पुराने नोटों को अवैध करना ही नहीं था। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य कर अनुपालन नहीं करने वाले भारतीय समाज को अनुपालन की दिशा में ले जाना था। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने के साथ ही कालेधन पर प्रहार करना भी था और इन उद्देश्यों को हासिल किया गया है।

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