युवा वह होता है जो आवेश नहीं करता : मुनिश्री

Samachar Jagat | Saturday, 14 Apr 2018 11:21:18 AM
Young is the one who does not do it: Munishri

मदनगंज-किशनगंज। मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म की शरण में आने वाला व्यक्ति नर से नारायण, इंसान से भगवान बन जाता है। आप जैसा चाहे वैसा कर सकते हैं, अशुभ को आप शुभ बना सकते हैं, पाप को पुण्य रूप कर सकते हैं, विपत्ति को सम्पत्ति बना सकते हैं। मुनिश्री ने उक्त विचार शुक्रवार को महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में धर्मसभा में व्यक्त किए।

मुनिश्री ने कहा कि धर्म वह है जो शांति का द्वार खोलता है। उम्र इसमें कारण नहीं है। आयु से वृद्ध होना अलग है पर विचारों, भावनाओं से वृद्ध होना अलग बात है। युवा वह होता है जो आवेश नहीं करता, विपरीत, प्रसंगों में तनाव नहीं करता जो समता का सहारा लेकर विपरीत प्रसंगों से लोहा लेता है। वृद्ध इनसे विपरीत होता है। 30-40 वर्ष का युवा भी वृद्ध कहला सकता है और 80-90 वर्ष का वृद्ध भी युवा कहला सकता है। युवकों के अंदर अगर कर्तव्य परायणता, सजगता, जागरूकता, चरित्रनिष्ठ आदि गुण है तो अपने आचरण की सुवास से जन-जन को सुवासित कर सकता है।

मुनिश्री ने कहा कि नर जीवन को पाकर अगर आपने आत्महित के लिए कुछ नहीं किया तो नर जीवन को पाने की सार्थकता नहीं होगी। धर्म के द्वारा आप उस अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं जिसके बाद पुन: दर-दर की ठोकरें नहीं खाना पड़ता। उत्साह, उमंग अगर आपके जीवन में है तो आप बहुत कुछ कर सकते हैं और जिनके जीवन में उत्साह उमंग नहीं है वह कुछ भी नहीं कर पाते है। 
प्रचार-प्रसार संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया शनिवार प्रात: 8:15 बजे से विघ्नहर मुनि सुव्रतनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। इसके बाद प्रात: 9:30 बजे मुनिश्री के प्रवचन, 10:30 बजे मुनिश्री की आहारचर्या, 12 बजे सामायिक व सायं 5:30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।



 

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