नई दिल्ली। भारत एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक मार करने वाले अपने इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) अग्नि- 5 का परीक्षण करने की तैयारी में लगा हुआ है। टेस्ट के लिए तैयारियां आखिरी चरण में हैं। माना जा रहा है कि दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरूआत में ओडिशा के वीलर आइलैंड से अग्नि-5 का परीक्षण किया जाएगा। इस मिसाइल के दायरे में पूरा चीन होगा, जिसकी वजह से इस टेस्ट को रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 48 देशों के एनएसजी में शामिल होने के लिए भारत के लिए कुछ रणनीति बनानी होगी। ये टेस्ट इसी का हिस्सा हो सकता है।
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1. एटमी हथियार ले जाने में कैपेबल अग्नि-5 करीब 5500 किमी तक मार कर सकती है।
2. अग्नि पांच को सेना में शामिल करने में अभी कुछ वर्ष का समय लगेगा। सशस्त्र बलों में पहले से ही अग्नि-प्रथम (700 किमी) और अग्नि-द्वितीय (2,000 किलोमीटर से अधिक) और 3000 किमी तक मार करने वाली अग्नि तृतीय मिसाइल पहले ही शामिल की जा चुकी हैं।
3. 50 टन वाली यह देश की पहली अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका कैनिस्टर संस्करण में पहली बार परीक्षण किया गया। तीन चरणों वाली इस मिसाइल की यह तीसरी टेस्ट फायरिंग थी।
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4. अग्नि पांच मिसाइल की लंबाई 17.5 मीटर है और इस पर करीब 2500 करोड़ रुपए की लागत आई है। ये मिसाइल 1.5 टन का हथियार किसी भी देश के अंदर तक ले जाने में सक्षम है।
5. ये मिसाइल भारत की परमाणु निरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।
6. अग्नि मिसाइलें परमाणु हमलों के खिलाफ भारत की प्रतिरोधी क्षमता का अहम हिस्सा हैं। इन मिसाइलों की रेंज 700 किलोमीटर से शुरु होती है और अब अग्नि 5 आने के बाद पाँच हजार किलोमीटर तक हो गई है।
7. इसे रक्षा अनुसंधान एंड विकास अनुसंधान (डीआरडीओ) ने ही विकसित किया है। ब्रिटेन, चीन, रूस और चीन जैसे देशों में जो अंतर महाद्वीपीय मिसाइलें हैं अग्नि 5 उन्हीं की टक्कर की है।
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8. अग्नि 5 में इस्तेमाल की गई तकनीकें अमरीका जैसे देशों की मिसाइलों में उपयोग होने वाली तकनीक से भी बेहतर है।
9. अग्नि 5 की तकनीकों में समग्र रॉकेट मोटर, माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम ( एमआईएनडीएस) शामिल है।
10. यह मिसाइल चीन के सुदूर उत्तरी इलाकों को भी निशाना बनाने में सक्षम है।
अग्नि-5 का अब तक हो चुके है तीन टेस्ट
जल्द होने वाला यह टेस्ट अग्नि-5 का चौथा टेस्ट होगा। अग्नि-5 का पहला टेस्ट अप्रैल 2012, दूसरा सितंबर 2013 और तीसरा जनवरी 2013 में हुआ। बताया जा रहा है कि यह अग्नि-5 का अंतिम टेस्ट होगा। इसमें इसके फुल रेंज को परखा जाएगा। इसके बाद ही स्ट्रैटिजिक फोर्सेज कमांड की तरफ से इसका यूजर ट्रायल शुरू किया जाएगा। मिसाइल को सेना में शामिल करने के लिए उत्पादन शुरू करने से पहले एसएफसी कम से कम दो टेस्ट करेगी।
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