दुबई। नोटबंदी के बाद भारत में अमान्य हुए 500 तथा 1,000 रुपये के पुराने नोट दुबई जा रहे हैं, जहां इनका इस्तेमाल घर के फर्नीचर, फोटो फ्रेम जैसी चीजें बनाने में होगा। गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। समाचार पत्र के मुताबिक, पी.के.मयान मोहम्मद ने कहा कि हार्डबोर्ड तथा फाइबर बोर्ड के लगभग 30-40 फीसदी उत्पाद अमान्य या खराब हो चुके नोटों की रिसाइकिलिंग से बनाए जाते हैं। भारत में अमान्य हुए नोटों को दुबई भेजा रहा है। नोटों की रिसाइकिलिंग के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने केरल स्थित पी.के.मयान मोहम्मद की कंपनी को चुना है। दुबई में मोहम्मद ने कहा, हम फाइबर बोर्ड को यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में निर्यात कर रहे हैं।
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बोर्ड का इस्तेमाल वार्डरोब जैसे फर्नीचर, फोटो फ्रेम तथा आइने के फ्रेम तथा दीवार का निर्माण करने के लिए किया जाता है। यह बताते हुए कि इसकी शुरुआत कैसे हुई, मोहम्मद ने कहा कि नोटबंदी की घोषणा के कुछ सप्ताह पहले तिरुवनंतपुरम स्थित आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय ने अमान्य नोटों का पुनर्चक्रण करने के लिए हमारी कंपनी की क्षमता के बारे में जानकारी ली थी। आरबीआई 20 अक्टूबर को मोहम्मद से मिली। उन्होंने हालांकि कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि बस कुछ ही समय बाद नोटबंदी की घोषणा होनेवाली है। गल्फ न्यूज के मुताबिक उन्होंने कहा, मुझे लगा कि उन्होंने खराब नोटों को जलाने की जगह उनका पुनर्चक्रण करने के लिए सोचा है। मुझे असल बात तब पता चली, जब प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा की। कंपनी पुनर्चक्रण के लिए थर्मोकेमिकल पल्पिंग तरीके का इस्तेमाल करती है।
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उन्होंने कहा, भारत में केवल हमारे पास ही यह प्रौद्योगिकी है। इसमें उच्च विद्युत ऊर्जा, वाष्प दाब तथा तापमान का इस्तेमाल होता है। कंपनी ने अमान्य नोटों के पल्प को एक कच्ची सामग्री की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया, जिसे वुड पल्प के साथ मिलाकर हार्डबोर्ड तथा फाइबरबोर्ड का निर्माण किया जाता है। एक बार जब इसमें सफलता मिली, तब आरबीआई ने कंपनी को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अमान्य नोटों को उठाने को कहा। मोहम्मद ने कहा, एक सप्ताह में हम बेकार हो चुके लगभग 60 टन नोट उठा रहे हैं।
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