आयुष्मान भारत योजना लागू करने में देरी संभव

Samachar Jagat | Saturday, 14 Jul 2018 10:54:28 AM
Delay in implementing Ayushman Bharat Scheme is possible

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दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत के आगामी तीन-चार महीने में लागू होने की संभावना है। हालांकि इस योजना के तहत दूसरे राज्यों में मुफ्त इलाज कराने पर पेच फंस गया है। इसके चलते योजना लागू होने की स्थिति में एक राज्य के मरीज दूसरे राज्य में इलाज नहीं करा सकेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार कुछ दिनों पहले नीति आयोग के साथ बैठक में तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने कुछ सवाल उठाए थे। इसमें कहा गया था कि दूसरे राज्यों के मरीजों द्वारा उनके राज्य में इलाज कराने पर अस्पताल के बिल का भुगतान कौन करेगा? साथ ही इन राज्यों का कहना था कि चूंकि उनके यहां इलाज की व्यवस्था बेहतर है, ऐसे में दूसरे राज्यों के लोग बड़ी संख्या में इलाज के लिए उनके यहां आ सकते हैं। 

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार शुरुआत में इस समस्या पर गौर नहीं किया गया था। लेकिन अब इस समस्या का समाधान खोज लिया गया है। इसके तहत अस्पताल को बिल का भुगतान वह राज्य करेगा, जिस राज्य में अस्पताल पंजीकृत है। बाद में राज्य सरकार उसे राज्य सरकार की स्टेट हेल्थ एजेंसी को यह बिल सेलटमेंट के लिए भेजेगी। 

दरअसल आयुष्मान भारत की देशभर में पोर्टेबिलिटी के लिए सभी 29 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को अलग से करार करना होगा। इसलिए इस योजना को लागू करने के लिए समय लग सकता है। इस प्रक्रिया का पालन करने में कोई समस्या न आए, सभी राज्यों को एक दूसरे के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर करने होंगे। इसका मॉडल ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। 

मंत्रालय का मानना है कि चूंकि इस करार की संख्या काफी अधिक है। इसलिए सभी राज्यों के बीच करार पूरा होने में समय लगने की संभावना है। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार इस योजना को 2 अक्टूबर गांधी जयंती से इसे लागू कर सकती है। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत 5 लाख रुपए का सालाना हेल्थ केयर इंश्योरेंस देंगे और योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। औसतन एक परिवार में 5 सदस्य माने जाएं तो करीब 50 करोड़ लोगों को इसका फायदा होगा। समस्या का समाधान यहीं नही हो जाता इसमें और भी कई पेच फंसे हुए हैं। भाजपा शासित 2 राज्य राजस्थान और महाराष्ट्र ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को लागू करने को लेकर अनिच्छुक है।

 राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारें इस योजना को लागू करने में इसलिए रुचि नहीं है, क्योंकि उनके यहां एक बड़ी आबादी के लिए इसी तरह की परियोजनाएं पहले से चल रही है। राजस्थान सरकार ने हालांकि केंद्र की योजना का स्वागत किया है, लेकिन वे इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि इसे कैसे लागू किया जाए, क्योंकि राजस्थान में पहले से ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना चल रही है। यही नहीं भामाशाह योजना में परिवार की मुखिया भी पुरुष के बजाए महिला को बनाया गया है। 

इसके अलावा ओडिशा पहले ही इसे लागू करने से इनकार कर चुका है। उसका कहना है कि उसके यहां पहले से ही बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना चल रही है। पंजाब और दिल्ली ने भी अभी तक इस योजना के लिए मंजूरी नहीं दी है। पश्चिम बंगाल सरकार असहमति के बाद भी इसे अपनाने के लिए सहमत हो गई है। ऐसी स्थिति में देश में सबको स्वास्थ्य बीमे की सुविधा देने के लिए आम बजट में घोषित आयुष्मान योजना को लागू करने में नियमों का पेच फंस गया है। इसके चलते इसे लागू करने में  अब और भी देरी हो सकती है। नियमों से जुड़ी एक दिक्कत योजना के लिए कोष जारी करने को लेकर आ रही है। 

यह परेशानी दरअसल योजना के लिए बजट आवंटित किए जाने के बावजूद सरकार द्वारा नियमों में बदलाव किए जाने के चलते खड़ी हुई है। केंद्र सरकार की ओर से बजट आवंटित होने के बाद योजना का स्वरूप तय किया गया था और पैसा सीधे राज्यों के खजाने में न देने का निर्णय लिया गया था। आमतौर पर सरकारी योजनाओं में केंद्र की ओर से दिया जाने वाला धन सीधे राज्यों के राजकोष में दिया जाता है।

 वहीं आयुष्मान योजना के लिए आवंटित 2000 करोड़ रुपए की रकम में से 600 करोड़ रुपए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए दिए जाने का प्रावधान है। इस तरह आयुष्मान भारत योजना तो अच्छी है, लेकिन राज्यों के रुख और इसके लिए धन की व्यवस्था किए जाने संबंधी समस्याओं के समाधान में आने वाली मुश्किलों का हाल खोजना भी जरूरी है।

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