ज्ञान को व्यवहार में लाने से ही वह सार्थक होता है

Samachar Jagat | Saturday, 11 May 2019 04:14:21 PM
It is worthwhile to bring knowledge into practice

आज ज्ञान की कमी नहीं है, ज्ञानियों की कमी नहीं है और राय देने वालों की भी कमी नहीं है बस कमी है तो सौ प्रतिशत सीखने और सौ प्रतिशत करने वालों की। यह हमेशा से कहा जाता रहा है कि अधूरा ज्ञान, थोड़ा ज्ञान बहुत खतरनाक होता है और यह बात भी सही है क्योंकि एक तो व्यक्ति ने ज्ञान को पूरा ग्रहण नहीं किया और दूसरा उस अधूरे ज्ञान को भी अहंकार की वजह से काम में नहीं लेते है, असली जामा नहीं पहनाते हैं। ऐसे मेें इसके भयंकर दुष्परिणाम निकल कर बड़ा नुकसान करते हैं। ज्ञान तभी सार्थक होता है जब उसको व्यावहारिक रूप दिया जाए, उसे अच्छे से उपयोग में लिया जाए।

इस तथ्य को समझने के लिए यहां एक उद्धरण दिया जा रहा है कैसे एक सैद्धान्तिक ज्ञान मात खाता है और कैसे एक प्रेक्टिकल ज्ञान संकट से आसानी से निकल जाता है। किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था। उसे तोते पालने का बड़ा शौक था, इसीलिए उसने अपने यहां पिंजरे में तीन तोते पाल रखे थे। वह अपने तोतों को बहुत ज्ञान अर्थात् प्रकाण्ड विद्वान बनाना चाहता था। इसी क्रम में उसने अपने तोतों को शिक्षित करना चाहा। सबसे पहले उसने अपने तीनों तोतों को शास्त्रों के बारे में सीखाना शुरू किया, बहुत दिनों तक यह क्रम चलता रहा। इसके बाद विज्ञान के बारे में पूरी जानकारी दी, फिर राजनीति सहित अन्य विषयों में भी उसने अपने तोतों को दक्ष बनाया। अब तीनों तोते आपस में हमेशा ज्ञान की चर्चा करते और ज्ञानी होने पर बहुत खुश होते। एक दिन अचानक उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई। 

यह देखकर तीनों तोते बहुत दुखी हुए। बहुत सारे रिश्तेदार उस व्यक्ति के घर पर आए और जब उन्होंने तोतों को देखा तो वे बोले अब इन तोतों को छोड़ देना चाहिए क्योंकि अब इनकी कोई भी देखभाल करने वाला नहीं है। उन्होंने तीनों तोतों को पिंजरे से बाहर करना चाहा। लेकिन वे बड़ी मुश्किल से उडक़र पास के एक पेड़ पर बैठ गए। अब वे तीनों आपस में ज्ञान पर चर्चा करने लगे। उस पेड़ पर पहले से ही एक जंगली तोता बैठा था। कुछ समय बाद ही उस पेड़ पर एक बिल्ली ने चढ़ना शुरू किया। उस जंगली तोते ने उन तीन तोतों से पूछा कि भाई तुम कौन हो? क्या तुम्हें उड़ना आता है? इस पर वे तीनों तोतों उड़ने की विधि बताने लगे, उस जंगली तोते को समझाने लगे कि कैसे उड़ा जाता है? इस पर जंगली तोते ने कहा फिर तो तुम्हारी कुछ पलों में मृत्यु होने वाली है, यह कहकर वह उड़ गया और बिल्ली उन तीनों तोतों को खा गई। इसलिए केवल सैद्धान्तिक और अधूरा ज्ञान जीवन को आगे नहीं बढ़ा सकता है जब तक कि उसे व्यावहारिक नहीं बनाया जाए।

प्रेरणा बिन्दु:- 
ज्ञानी-ध्यानी बने हुए हो
अहंकार से भरे हुए हो
कोरे ज्ञान का मतलब होता
बिना मारे ही मरे हुए हो।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.