मानसिक शांति जीवन का सबसे बड़ा सुख है

Samachar Jagat | Friday, 24 May 2019 03:10:50 PM
Mental peace is the greatest pleasure of life

आज व्यक्ति के पास सब कुछ है जो वह चाहता है अर्थात् वह अच्छा सा घर चाहता है, उसमें बड़ा सा लॉन चाहता है, महंगी कार चाहता है, मोबाइल एक नहीं दो-तीन चाहता है, शानदार कपड़े और शानदार पद चाहता है, महंगी अंगूठी और मोटी सी चेन चाहता है, मोटा बैंक बैंलेस और सारे जहां में प्रतिष्ठा चाहता है और हम दो और हमारे एक के साथ रहना चाहता है, इन सबको पाने के लिए दिन-रात दौड़ता रहता है, शॉर्टकट अपनाता रहता है, छल-प्रपंच में फंसा रहता है, जो चाहे जब चाहे खाता रहता है और बावजूद इन सबके वह शिकायत करता रहता है, रोता रहता है, दवाइयां फांकता रहता है और झगड़ता रहता है हम दो हमारे एक के साथ। इसका सीधा सा मतलब यही निकलता है कि वह चौबीसों घंटों बेचैन है, अकूत सम्पत्ति पाकर भी, उसको किसी ने भी चैन नहीं दिया। घर, गाड़ी, पद, प्रतिष्ठा, सोना-चांदी, रुपया-पैसा सबने बेचैन कर दिया।

ये जितने ज्यादा आए, उतनी ही बेचैनी अपने साथ लाए। इन सबका कारण है एक-दूसरे से ईष्र्या और हौड़। आज का व्यक्ति तन से बीमार है और मन से बीमार है। इस तन-मन से बीमार होने का मूल कारण धन है। इस धन-दौलत और भौतिक सम्पत्ति का संबंध बाहरी दुनिया से है, हौड़ की दुनिया से है, छल-कपट की दुनिया से है और बेचैनी की दुनिया से है। 

यदि सच में किसी को स्थायी शांति चाहिए, स्थायी सुख चाहिए, स्थायी खुशी चाहिए, स्थायी स्वास्थ्य चाहिए, स्थायी और मधुर संबंध चाहिए, स्थायी सम्मान चाहिए और सार्थक जीवन चाहिए जो उसे अपनी भीतर की दुनिया में प्रवेश करना होगा, उसमें गहरे तक उतरना होगा, फिर देखिए उसमें से आनंद के मोती निकलेंगे, खुशी के फव्वारे फूटने लगेंगे, मधुरता की रसधारा प्रवाहित होने लगेगी, प्रेम की सरिता बहने लगेगी और सुखद जीवन प्रस्फुटित होने लगेगा, जीवन बढ़ने लगेगा, जीवन सर्वकल्याण करने लगेगा अर्थात् जीवन युद्ध नहीं रहेगा, जीवन संघर्ष नहीं रहेगा, जीवन दर्दों की सेज नहीं रहेगा, जीवन क्षणिक नहीं रहेगा, जीवन युगों की ओर बढ़ेगा और यौं कहें कि जीवन एक महा उत्सव बन जाएगा। भीतर अथाह शांति के भण्डार हैं अनंत खुशियों के भण्डार हैं और ये सब भण्डार आपको मिल सकते हैं- योगा से, मेडिटेशन से, सकारात्मक सोच से और सद्कर्म से।

प्रेरणा बिन्दु:- 
चकाचौंध की इस दुनिया में से
खोज रहा है चैन आदमी
सर तक गड़ा हुआ धन में वह
फिर भी है बेचैन आदमी।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
रिलेटेड न्यूज़
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.