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1 फरवरी को पेश होने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट से मिडिल क्लास को एक बार फिर राहत की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष में 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करने से आम टैक्सपेयर को बड़ी राहत मिली थी। इसके बाद सितंबर-अक्टूबर में GST दरों में कटौती हुई। अब ध्यान TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) पर केंद्रित है, जिसे कई लोग जटिल और भ्रमित करने वाला मानते हैं।
सरकार से उम्मीद की जा रही है कि TDS स्लैब और नियमों को सरल बनाया जाएगा, जिससे आम टैक्सपेयर की उलझन कम होगी और गलतियों की संभावना घटेगी।
मौजूदा TDS की जटिलता
वर्तमान में भारत में निवासियों के लिए छह अलग-अलग TDS दरें लागू हैं—0.1%, 1%, 2%, 5%, 10%, और 20%। विभिन्न लेन-देन पर ये दरें भ्रम पैदा करती हैं और गलत टीडीएस कटौती की शिकायतें आती हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार छह स्लैब को घटाकर केवल दो स्लैब (जैसे 1% और 5%) रख सकती है। इससे नियम आसान होंगे और विवाद कम होंगे।
विवाद वाले मामलों के लिए समान थ्रेशोल्ड
कई TDS नियमों में अलग-अलग सीमा होने से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कौन सी दर लागू होगी। इससे टैक्सपेयर और विभाग के बीच अक्सर मतभेद होते हैं। विवाद वाले मामलों के लिए एक समान सीमा तय करने से गलतियां कम होंगी और नियम पालन सरल होगा।
ई-लेजर सिस्टम का सुझाव
एक और महत्वपूर्ण सिफारिश है कि TDS और TCS क्रेडिट को ई-लेजर में डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड किया जाए, जैसा GST में होता है।
ई-लेजर के फायदे:
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सभी टीडीएस/टीसीएस क्रेडिट का एक जगह रिकॉर्ड
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बचा हुआ क्रेडिट अगले वित्त वर्ष में इस्तेमाल या रिफंड
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तेजी से प्रोसेसिंग और कम मैनुअल काम
ई-लेजर पारंपरिक कागजी लेखा-जोखा की जगह डिजिटल, व्यवस्थित रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करेगा।
मिडिल क्लास के लिए इसका मतलब
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सरल नियम: कम स्लैब और समान थ्रेशोल्ड
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बेहतर टैक्स योजना: क्रेडिट को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे
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विवाद कम होंगे: नियमों में मानकीकरण से गलतफहमियां घटेंगी
12 लाख रुपये तक टैक्स फ्री की राहत के बाद, अब मिडिल क्लास को TDS सुधारों के जरिए और राहत मिलने की उम्मीद है।
बजट 2026 पर मिडिल क्लास की नजर है। यदि टीडीएस स्लैब सरल किए जाएं, थ्रेशोल्ड मानकीकृत हों और ई-लेजर सिस्टम लागू हो, तो यह लाखों भारतीयों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।