हमास ने अक्टूबर 2023 में हमला करके योजनाबद्ध रूप से दिया यौन आतंक को अंजाम, पीड़ितों में 52 देशों के नागरिक शामिल

Hanuman | Thursday, 14 May 2026 04:46:42 PM
Hamas systematically perpetrated sexual terror during its attack in October 2023; victims include citizens from 52 countries

इजरायली सिविल कमीशन की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

जयपुर। आज सिविल कमीशन ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की अपनी 300 पेज की जाँच रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक इज़रायल में 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमले के दौरान तथा गाज़ा में बंधक बनाकर ले जाए गए लोगों के खिलाफ ‘‘योजनाबद्ध और व्यापक’’ रूप से यौन और जेंडर पर आधारित हिंसा (एसजीबीवी) को अंजाम दिया गया। ‘‘साइलेंस्ड नो मोरः सेक्सुअल टेरर अनवील्ड’’ (अब और चुप्पी नहींः यौन आतंक का खुलासा) नाम की इस रिपोर्ट में जाँचकर्ताओं ने व्यापक प्रमाण और रिकॉर्ड पेश किए हैं, जिनसे यह खुलासा होता है कि ये जघन्य अत्याचार हिंसा की आकस्मिक घटनाओं की बजाय युद्ध के सोचे-समझे हथियार थे।

ये नतीजे डॉ. कोचाव एल्कायम-लेवी के नेतृत्व में की गई दो साल की तहकीकात के बाद मिले हैं। जाँचकर्ताओं द्वारा 10,000 से अधिक फोटो, वीडियो तथा 1,800 घंटे से अधिक के विज़्युअल प्रमाणों की समीक्षा की गई। पीड़ितों, गवाहों, वापस आए बंधकों, विशेषज्ञों और उनके परिवार के सदस्यों के 430 से अधिक साक्षात्कार लिए गए, उनके बयान दर्ज किए गए तथा उनके साथ बैठकें की गईं। कमीशन के अनुसार, पीड़ितों में 52 देशों के नागरिक शामिल थे, जिससे स्पष्ट होता है कि इन अपराधों का दायरा अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक फैला था। कमीशन के मुताबिक उत्पीड़न एक पैटर्न में बार-बार दोहराया गया, जिसमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अंगों को काटना, जबरदस्ती नंगा करना, यौन अपमान करना, जान से मारकर शव को अपमानित करना और आतंक फैलाने के लिए हिंसा का वीडियो बनाकर उसका प्रसार करना शामिल था।

इस रिपोर्ट के मुताबिक ये अपराध ‘‘किनसाईडल यौन हिंसा’’ पर केंद्रित थे। यानी यौन अपराध परिवार के सदस्यों के सामने किए गए, उनका इस तरह से उत्पीड़न किया गया, जिससे पारिवारिक रिश्ते खत्म हों और स्थायी मनोवैज्ञानिक आघात हो। इस रिपोर्ट में ‘‘आतंक के डिजिटल थिएटर’’ का विस्तार से जिक्र किया गया है। यानी इन दुष्कृत्यों का वीडियो बनाया गया और उन्हें पीड़ितों के अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से हाथों-हाथ प्रसारित किया गया। यह रिपोर्ट यूनाईटेड नेशंस की विशेष प्रतिनिधि, प्रमिला पाटन द्वारा पहले दिए गए नतीजों की पुष्टि करती है, जिनके मुताबिक हमलों के दौरान और बाद में इस तरह की हिंसक घटनाएं हुई थीं, इस पर ‘‘यकीन करने के ठोस आधार’’ मौजूद हैं।

कमीशन के अनुसार ये अपराध अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार की श्रेणी में आते हैं। कमीशन ने निष्कर्ष दिया कि इन अपराधों के खिलाफ तुरंत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। सार्वभौम न्यायक्षेत्र का उपयोग करके अपराधियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए तथा युद्ध के समय हुई यौन हिंसा के लिए विशेष ज्यूडिशियल चैंबर स्थापित किए जाने चाहिए। डॉ. एल्कायम-लेवी ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय के लिए इन अपराधों को औपचारिक पहचान दिया जाना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन घटनाओं को स्थायी ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सही-सही दर्ज किया जाए।

सिविल कमीशन एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी संगठन है, जिसमें युद्ध अपराधों को दर्ज करने के लिए समर्पित कानूनी विशेषज्ञ और मानव अधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं। इस रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय कानूनी अधिकारियों, जैसे माननीय इरविन कोटलर और प्रोफेसर डेविड क्रेन ने अपना योगदान दिया है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक और न्यायिक समीक्षा के लिए कमीशन की आधिकारिक वेबसाईट पर उपलब्ध है।



 


ताज़ा खबर

Copyright @ 2026 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.