तो इस तरह कोरोना वायरस से लड़ रही है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार !

Samachar Jagat | Tuesday, 31 Mar 2020 08:29:15 PM
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कोरोना वायरस को लेकर देश में कोहराम मचा है. केंद्र हो या राज्य सरकार इससे निपटने के लिए कोशिश भी कर रही हैं और दावा भी. लेकिन यूपी सरकार इसे लेकर उदासीन दिखाई देती है. डीएम को भरी बैठक में जलील करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इंतजाम ऐसा नहीं है जिसे लेकर इतराया जा सके. हिंदी के बड़े साहित्यकार हैं नरेश सक्सेना. लखनऊ में रहते हैं. उन्होंने जो अनुभव साझा किया है वह डराने वाला भी है और सरकार के कामकाज को कठघरे में खड़ा करने वाला भी. नरेश सक्सेना के मुताबिक लखनऊ मेडिकल कालेज में वे अपनी बहू को साढ़े दस बजे दिखाने ले कर गए थे. उनकी बहू आठ दिन से परेशान थीं. उन्हें ज़ुकाम, बुख़ार, नाक बंद, गले और हड्डियों में दर्द था. सांस भी फूल रही थी.

नरेश सक्सेना ने अपने फेसबुक पर इसे साझा करते हुए लिखा कि हम दिल्ली शादी में गए थे, जहां अमेरिका से भी रिश्तेदार आए थे. बहू को देखने और सब सुनने के बाद डाक्टरों ने कहा कि घर जाकर आइसोलेशन में रहें और दो हफ्ते बाद हाल बताएं. अस्पताल में कोई सुध लेने वाला नहीं था. घर आकर 112 नंबर पर फ़ोन किया तो दो सिपाही आए. नरेश सक्सेना कहते हैं कि पूरा हाल सुना फिर शायद किसी प्रशासनिक आफ़िस को फ़ोन किया. उन्हें पूरा हाल बताया तो कहा कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट करनी होगी. एक घंटे बाद बताएंगे. एक घंटे बाद बताया, अभी निर्णय नहीं हुआ कल सुबह पता चलेगा.

नरेश सक्सेना ने कहा कि हम लोग बहू को लेकर इसी बीच गोमतीनगर के सिटी हैल्थ अस्पताल गए. सौ मीटर की दूरी के लिए एंबुलेंस ने एक हज़ार (आना जाना) लाया. डाक्टर ने पांच सौ रुपए फीस ली. फीस लेकर कहा कि हम इलाज नहीं कर सकते. डाक्टर से पूछा कि कहां जाए तो उन्होंने कुछनहीं बताया. लखनऊ में कोरोना के एक कोरोना के नोडल अधिकारी का मिला. उन्हें फोन किया तो वह बंद मिला. पता चलाया तो बताया गया कि राममनोहर लोहिया अस्पताल में शायद सैंपल लेलेंगे लेकिन वहां जांच नहीं होती. फिर बनारस, इलाहाबाद वगैरह जाने की सलाह दी गई. यानी कहीं कोई मदद नहीं. नरेश सक्सेना की तहरीर झकझोरने वाली है. कोरोना वायरस के संकट से योगी आदित्यनाथ सरकार किस तरह लड़ रही है यह बानगी भर है. हालांकि उनके मंत्री और भाजपा नेताओं के लिए सब कुछ बहुत आसानी से मिल जा रहा है.

वह भी तब जब कोरोना वायरस से लोगों मर रहे हैं. लाखों कामगार पलायन को मजबूर हैं. देश में इतना बड़ा संकट सामने खड़ा है. लेकिन भाजपा नेताओं की शानो-शौकत में कोई कमी नहीं आ रही है. उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के बंगले पर आने जाने वाले आगंतुकों की स्क्रीनिंग करने के लिए चार स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए गए हैं. यह तैनाती योगी सरकार की मेहरबानी से लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने किया है. आदेश में कहा गया है कि ये चारों कर्मी मंत्री जी के यहां आने वाले मेहमानों की थर्मल स्कैनिंग और चार्टिंग का कार्य सुनिश्चित करेंगे. दो कर्मचारी सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक काम करेंगे, तो बाकी के दो कर्मचारी तीन से रात दस बजे तक ड्यूटी बजाएंगे. काम करने की सूचना इन कर्मचारियों को विभाग को देना भी होगा.

भाजपा नेता के यहां स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती तब की गई है जब खुद राजधानी लखनऊ में डॉक्टरों और दूसरे कर्मचारियों की बहुत कमी है. एक तरफ नरेश सक्सेना का मामला है. पीड़ितों की स्क्रीनिंग नहीं हो रही जिसकी वजह से कोरोना को फैलने में मदद मिल रही है. लेकिन भाजपा अध्यक्ष की सेवा में योगी आदित्यनाथ ने चार स्वास्थ्यकर्मी लगा दिए. सवाल यह है कि सरकारी कर्मचारी जनता की सेवा के लिए हैं या फिर वे भाजपा नेताओं की सेवा में लगे रहेंगे. नोएडा के डीएम को सरेआम जलील करने के बाद फिर से योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठ रहे हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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