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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के पोस्ट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इस इस संबंध में कहा कि मोदी सरकार की असहिष्णुता और तानाशाही प्रवृत्ति अब चरम पर पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि केन्द्र सरकार ने एक्स और इंस्टाग्राम को प्रधानमंत्री पर बने व्यंग्य और आलोचनात्मक पोस्ट हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। एक मजबूत लोकतंत्र में आलोचना और व्यंग्य का स्वागत होना चाहिए, लेकिन सच और सवालों से इतना डरना यह दर्शाता है कि यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों में अपना विश्वास खो चुकी है।
अशोक गहलोत ने कहा कि इस पूरे मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सेंसरशिप की इस कुल्हाड़ी से वो दक्षिणपंथी (Right-wing) समर्थक भी नहीं बच पाए, जो अक्सर सरकार का अंधा बचाव करते हैं। यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठाने मात्र से उनके अकाउंट्स भी ब्लॉक कर दिए गए। यहां तक की कई दक्षिणपंथी इन्फ्ल्यूएंसरों के घर पर पुलिस ने जाकर उन्हें धमकाया।
मोदी सरकार को सिर्फ सवाल न पूछने वाली 'अंधी चापलूसी' चाहिए
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संबंध में आगे कहा कि यह स्पष्ट करता है कि मोदी सरकार को न तो किसी विचारधारा और न ही उनके समर्थकों से भी कोई लगाव नहीं है। इन्हें सिर्फ सवाल न पूछने वाली 'अंधी चापलूसी' चाहिए। भाजपा के समर्थकों की भी यह सोचना चाहिए कि ये देश में हो क्या रहा है। देश में यह अघोषित आपातकाल बेहद चिंताजनक है।
PC: bhaskar
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