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जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अभी दो साल से ज्यादा का समय है। इससे पहले प्रदेश में कांग्रेसी नेताओं के बीच एक नई वर्चस्व की लड़ाई जन्म लेती नजर आ रही है। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के तेवर बदले हुए नजर आ रहे हैं। इस बाद गोविंद सिंह डोटासरा बनाम अशोक गहलोत के बीच नई वर्चस्व की लड़ाई होती नजर आ रही है। डोटासरा को एक समय पूर्व सीएम अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है। अब दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी सामने नजर आ रही है। गोविंद सिंह डोटासरा के बयानों से ऐसा नजर आ रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि डोटासरा अब गहलोत की छत्रछाया से बाहर निकलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
आपको बात दें कि गुरुवार को पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के साथ 309 बीएपी कार्यकर्ता गहलोत के सिविल लाइंस घर पर पहुंचे। यहां पर चौथी बार गहलोत सरकार, हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो अशोक गहलोत जैसा हो के नारे लगे। इसके बाद सभी कार्यकर्ताओं ने पीसीसी जयपुर में भी ऐसा ही किया। महेंद्रजीत सिंह मालवीया भाषण दे रहे थे तो डोटासरा ने माइक उनके हाथ से लेकर बोल दिया कि मुख्यमंत्री वाला नारा कोई नहीं लगाएगा, किसी के व्यक्तिगत नाम का नारा मत लगाओ। इसके बाद डोटासरा ने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी ब्रांडिंग के लिए काम करता है वो उनको मुबारक हो, मैं किसी की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करता, मैं तो सिर्फ कांग्रेस के लिए काम करता हूं।
उन तमाम लोगों पर 'धिक्कार' है…
वहीं डोटासरा ने एक्स के माध्यम से भी कहा कि उन तमाम लोगों पर 'धिक्कार' है… जो राजनीतिक द्वेषतापूर्वक मुझ पर अनर्गल आरोप लगाते हैं और लगवाते हैं। अगर 5 साल में भी आरोप साबित नहीं कर पाए.. तो 'लानत' है ऐसे लोगों पर जो मेरी छवि धूमिल करने के लिए दिन-रात षड्यंत्र करते हैं। मैं चुनौती देता हूं.. अगर हिम्मत है तो मुझ पर लगे आरोपों की और भाजपा सरकार में कृषि विभाग में हुए 500 करोड़ के भ्रष्टाचार पर मंत्री का नार्को टेस्ट कराओ।
PC: abplive
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