नागरिकता संशोधन बिल पर भड़क उठे असदुद्दीन ओवैसी, बोले ये बिल...

Samachar Jagat | Thursday, 05 Dec 2019 09:03:44 PM
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मोदी सरकार देश में नागरिकता संशोधन बिल पेश करने जा रही है। हालांकि इसके आने से पहले ही राजनीति गरमा गई है। विरोधी दलों ने इस बिल को लेकर मोदी सरकार को घेरना भी शुरू कर दिया है। इस बिल में ऐसे मुद्दे हैं जिनको लेकर विरोध हो रहा है। नागरिकता संशोधन बिल पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने इस बिल के खिलाफ बयान दिया है।



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11 साल से भारत में रहना जरूरी

मोदी सरकार जो बिल लेकर आ रही है, उसके हिसाब से 11 साल से भारत में रहना जरूरी है। इस बिल में बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की ओर से आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता दी जानी है। हालांकि बिल में मुस्लिम समुदाय का जिक्र नहीं है। ये कानून 1955 में नागरिकता अधिनियम 1955 के नाम से बन चुका है। इसी को संशोधित किया जा रहा है। जानें क्या बोले सांसद असदुद्दीन ओवैसी

नागरिकता बिल 1955 के संशोधन को लेकर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भड़क उठे हैं। उन्होंने इस बिल पर सवाल उठा दिए हैं। ओवैसी का कहना है कि ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के खिलाफ है। उन्होंने कहा है कि एक देश में नागरिकता को लेकर दो कानून कैसे हो सकते हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार धर्म के आधार पर कानून बना रही है और देश को बांटने की साजिश हो रही है। वो बोले कि मोदी सरकार मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है।

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(न्यूज सोर्स- abpnews.abplive.in)


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