भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से लोगों के हाल-बेहाल

Samachar Jagat | Wednesday, 12 Jun 2019 11:14:16 AM
People of the horrific heat and thundering of Lou

प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के चलते रविवार को दिन भर सडक़ों और बाजारों में सन्नाटा छाया रहा। यही हाल करीब-करीब सोमवार को भी रहा। रविवार को धोलपुर का अधिकतम तापमान दो डिग्री बढ़ोतरी के साथ 50 डिग्री तक पहुंच गया। मानसून के दक्षिण भारत में केरल तट पर दस्तक देने के बावजूद राजस्थान में गर्मी रोज नए रिकार्ड तोड़ रही है। जून में पारे ने तीसरी बार 50 डिग्री को पार किया है। 

प्रदेश में 10 दिन से लगातार कोई न कोई शहर 50 डिग्री सेल्सियस तापमान की गिरफ्त में रहा है। रविवार को प्रदेश के 6 शहरों धोलपुर, श्रीगंगानगर, फलौदी, चूरू, कोटा और बीकानेर में पारा 48 डिग्री सेल्सियस से पार रहा। जयपुर जिले में गर्मी ने 10 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। जोबनेर में पारा 47 डिग्री दर्ज किया गया। कोटा में भीषण गर्मी का अब तक का रिकार्ड 25 मई 2010 का है। इस दिन पूरे सीजन में 48.4 डिग्री तक पारा पहुुंच गया था। उसके बाद बीते रविवार को सबसे गर्म दिन रहा। वहां अधिकतम तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। रविवार को भीषण गर्मी के चलते प्रदेश में 5 लोगों की जान चली गई। अब तक इस महीने में 21 लोग गर्मी के कारण जान गंवा बैठे है। राजस्थान ही नहीं देश के अधिकांश हिस्सों में गर्म हवाओं और लू के थपेड़ों ने लोगों का हाल-बेहाल कर रखा है। यह सब जलवायु परिवर्तन के एक बड़े खतरे के रूप में उभर रही है। 

विश्व में ग्लोबल वार्मिंग का खतरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे गर्मी हवाओं का खतरा भी चिंताजनक होता जा रहा है। देश में गर्म हवाओं ने अपना दायरा बढ़ा लिया है और कुछ घंटे चलने के बजाए कई दिनों तक चलने लगी है। इस बार करीब-करीब एक तिहाई भारत गर्म हवाओं के चपेट में है। पहले ऐसी गर्म हवाएं और लू चलने की घटनाएं 10 वर्ष में एक बार होती थी। लेकिन अब ऐसा हर दूसरे या तीसरे वर्ष में होने लगा है। पुरानी कहावतें और पुराने संकेत अब धूमिल होने लगे हैं। राजस्थान को ही लें। पहले यह कहावत थी कि सीयाल सीकर भली जी, उन्दहालो अजमेर, सदा सुरंगों मेड़तोजी, सावण बीकानेर। इसका अर्थ है कि सर्दी में सीकर का मौसम अच्छा रहता है। गर्मी में अजमेर और मेवाड़ जहां हमेशा मौसम सुहाना रहता था और श्रावण में बरसात का मौसम बीकानेर का अच्छा होता था। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सब कुछ मटियामेट हो गया है।

 मेवाड़ में झीलों की नगरी कही जाने वाले उदयपुर में आज सूखे की स्थिति बन गई है। फतहसागर झील जहां बारहों महीने पानी रहता था, वहां अब आधी झील सूख चूकी है और वहां फुटबॉल का मैदान बन गया है। पहले सीकर में सर्दी ज्यादा पड़ती थी, अब तो चूरू सहित कई जिले ऐसे है, जहां गर्मी और सर्दी दोनों का देश भर में सर्वाधिक रिकार्ड है। बरसात की कमी के कारण अब बीकानेर सावण का पुराना नजारा देखने को नहीं मिलता। अजमेर में जहां गर्मी का मौसम सुहाना रहता था, वहां लू के थपेड़ों से हाल-बेहाल है। बुजुर्गों की मान्यता थी कि आषाढ़ माह के प्रथम चार दिन आकाश में जैसी स्थिति होती है, वैसे ही बरसात या चौमासा या चातुर्मास के चारों महीनों के संकेत मिल जाते थे। बरसात को लेकर आषाढ़ माह में दोज के चांद की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था। कहावत है कि सूतो तो सदा भलो-ऊमो भलो आषाढ़। अर्थात् आषाढ़ में अगर दूज का चांद खड़ा दिखे तो अच्छा रहता है। अन्य महीनों में सोता हुआ अर्थात् सीधा चंदोदय ठीक रहता है। 

बरसात के संकेत की एक कहावत और है वह है। सूरज कुंडयालो-चांद गिलेरी। टूटे टीबा भरे डेरी। अर्थात् सूर्यदेव के चारों ओर अगर बड़े आकार में गोल चक्कर बनता है और चांद के आसपास छोटे आकार में लाल रंग का गोला बनता है तो बरसात इतनी अधिक होती है कि टीले बरसात टूट कर बहने लगते हैं और टीलों के बीच में तालाब बन जाते है। अब यह सभी कहावतें और संकेत जलवायु परिवर्तन के इस दौरा में बदल गए हैं। अब तो नई कहावतें और नए संकेत वैज्ञानिकों की कसौटी पर खरे उतरने वाले ही मान्य है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर के विशेषज्ञों ने 1951-2015 के बीच चलने वाली लू का अध्ययन करने के बाद नतीजा निकाला है कि पांच सबसे बड़ी गर्म हवाएं चलने की घटनाएं 1990 के बाद हुई है। 

शोध के अनुसार 2021-2051 के 30 वर्षों में लू की घटनाएं 8 गुना बढ़ेगी, जबकि 2071-2100 के बीच वृद्धि 30 गुना तक हो जाएगी। देश के करीब-करीब सभी इलाकों में गर्म हवाएं चलेंगी। 1901 के बाद से अब तक जो 15 सबसे गर्म वर्ष दर्ज किए गए हैं। उनमें से छह पिछले 10 वर्ष के दौरान ही दर्ज हुए हैं। इस दौरान औसत तापमान में पौन डिग्री तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ये वर्ष हैं 2009, 2010, 2015, 2016, 2017 तथा 2018। इस साल जिस प्रकार से भयावह गर्मी पड़ रही है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि गर्म वर्षों की सूची में एक साल और जुड़ जाएगा। पिछले दो दशकों में ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है जिससे गर्म हवाएं बढ़ रही है। अध्ययन बताते हैं कि औसत तापमान बढ़ रहा है तथा अधिकतम तापमान में चार-पांच डिग्री की बढ़त आम बात है। पृथ्वी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश के 35 जिलों के अधिकतम तापमान में चार डिग्री या इससे अधिक की वृद्धि गर्मियों में दर्ज की गई है। जिससे इन जिलों में रहने वाले 3.6 करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। 

इनमें जयपुर, भीलवाड़ा, झालावाड़, पश्चिमी त्रिपुरा, शिवपुरी, गुना आदि जिले शामिल है। इसी प्रकार आईआईएम, अहमदाबाद की रिपोर्ट के अनुसार 346 ऐसे जिलों की पहचान की गई है जिनके औसत तापमान में दो-तीन डिग्री की बढ़त हो चुकी है। ये जिले उत्तरी राज्यों एवं बिहार में है। 2045 तक इन जिलों में गर्म हवाएं चलने का खतरा और बढ़ जाएगा। हाल में क्लाइमेट ट्रेंड ने एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा तथा राजस्थान में 2017 में मार्च में ही गर्म हवाएं चलनी शुरू हो गई, जबकि अप्रैल से गर्म हवाएं चलनी शुरू होती है। जो झुलसाने वाली गर्म हवाएं पहले 100 साल में एक बार चलती थी। अब 10 वर्ष में एक बार चलने लगी है। पिछले 50 सालों में लू वाले दिनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 

1961-70 के दशक में करीब 500 दिन ऐसे थे, जब लू चली हो लेकिन 2001-10 के बीच ऐसे दिनों की संख्या 700 के करीब पहुंच गई है। गर्म हवाओं को लेकर लांसेट जर्नल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2000 से 2017 के बीच विश्व में करीब 15.70 करोड़ अतिरिक्त लोग गर्म हवाओं के कारण जोखिम के दायरे में आ गए। यह आंकड़ा 2016 की तुलना में भी 1.8 करोड़ ज्यादा है। बढ़ती गर्मी से इन लोगों के स्वास्थ्य, रहन-सहन एवं कामकाज के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हुई है। भारत में 2016 में चार करोड़ अतिरिक्त लोग 2012 की तुलना में लू की चपेट में आए। इस बढ़ते खतरे के बारे में पूरी तैयारी व अध्ययन की जरूरत है। लू के घातक प्रभाव को कम करने के लिए सरकार को विशेषज्ञों के साथ मिलकर हरसंभव प्रयास करने चाहिए।



 

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