महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल समस्या है पीसीओडी 

Hanuman | Wednesday, 27 May 2026 12:27:44 PM
PCOD is a rapidly increasing hormonal problem among women

पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज महिलाओं में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल समस्या है। इसमें अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट (गांठ जैसी थैलियाँ) बनने लगती हैं और अंडोत्सर्जन नियमित रूप से नहीं हो पाता। इससे महिलाओ में कई प्रकार की समस्यायें उत्पन्न हो जाती है। इस रोग में शरीर में पुरुष हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है तथा कई अन्य समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। पीसीओएस अपेक्षाकृत अधिक गंभीर स्थिति मानी जाती है, जबकि पीसीओडी अपेक्षाकृत सामान्य और नियंत्रित की जा सकने वाली अवस्था है। दोनों में लक्षण समान हो सकते हैं, परंतु पीसीओएस में हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक समस्याएँ अधिक होती हैं।

पीसीओडी के कारण: पीसीओडी का एकमात्र निश्चित कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन निम्न कारण प्रमुख माने जाते हैं—हार्मोन असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस,आनुवंशिक कारण,मोटापा बढ जाना, तनाव और चिंता बनी रहना, अनियमित दिनचर्या का पायाजाना, जंक फूड या फास्ट फूड व अधिक तैलीय भोजन करना, शारीरिक गतिविधि की कमी रहना आदि।

पीसीओडी के प्रमुख लक्षण: मासिक धर्म संबंधी कुछ लक्षण, पीरियड्स का अनियमित रहना,कभी भी समय पर नहीं आना, कई महीनों तक मासिक धर्म का न होना,महिला को चिन्ता में डाल देता है, अत्यधिक या बहुत कम रक्तस्राव का होना।

शरीर संबंधी लक्षण: वजन का बढ़ना ,मोटापा दिखाई देना, पेट के आसपास चर्बी जमा होना,पेट मोटा दिखना, चेहरे पर मुहाँसे आदि बार-बार निकलना, त्वचा का तैलीय होना,गर्दन या बगल में काली त्वचा दिखना।

बालों संबंधी लक्षण: चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल आना, सिर के बाल पतले होना या झड़ना।

प्रजनन संबंधी समस्याएँ: गर्भधारण में बहुत कठिनाई होना या न होना, ओव्यूलेशन का न होना।

पीसीओडी की जांच: डॉक्टर निम्न जांच कराने की सलाह दे सकते हैं— सोनोग्राफी, हार्मोनल जांच, ब्लड शुगर टेस्ट, थायरॉइड की जांच,लिपिड प्रोफाइल आदि। 

पीसीओडी से होने वाली संभावित जटिलताएँ: यदि उपचार न किया जाए तो आगे चलकर महिलाओं में मधुमेह का खतरा हो सकता है, उच्च रक्तचाप रह सकता है, बांझपन हो सकता है, मोटापा बढ़ जाता है,मानसिक तनाव व अवसाद हो जाता है,हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है आदि।

पीसीओडी में बचाव व जीवनशैली: खानपान पर ध्यान देना चाहिए, हरी सब्जियाँ और फल अधिक लिये जाय, चीनी और मैदा का प्रयोग कम से कम करें, जंक फूड या फास्ट फूड से बचें,होटल रेस्टोरेंट में खाने से बचें, पर्याप्त पानी पिवें, नियमित व्यायाम करें,योग और प्राणायाम भी इसमें लाभकारी होता है, वजन नियंत्रित रखें,बढने न दें।

मानसिक स्वास्थ्य: तनाव कम करें,चिन्ता फिकर न करें, पर्याप्त नींद लें,कम से कम 7-8 घंटे नींद आवश्यक होती है।

पीसीओडी में उपयोगी योग: भुजंगासन,कपालभाति, अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार, मंडूकासन आदि।

पीसीओडी का होम्योपैथिक उपचार: होम्योपैथी में रोगी के सम्पूर्ण लक्षण, मानसिक स्थिति तथा शारीरिक प्रकृति के आधार पर दवा दी जाती है। सही दवा और उचित शक्ति (पोटेंसी) का चयन योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए। स्वयं बिना चिकित्सकीय राय के दवा न लें।वैसे तो होम्योपैथिक दवायें अनेक हैं जो रोग की स्थिति के अनुसार ही दी जाती है,फिर भी कुछ इस प्रकार है- 

प्रमुख होम्योपैथिक दवाएं:1. पल्सेटीला: मासिक धर्म अनियमित को नियमित करने में सहायक होती है। भावुक स्वभाव वालों को फायदेमंद, पीरियड्स में देरी रहना, हार्मोन असंतुलन में उपयोगी।
2. सीपिया: थकान और चिड़चिड़ापन रहना, चेहरे पर दाग धब्बे हो जाना, गर्भाशय संबंधी कमजोरी होना, हार्मोनल समस्याओं में उपयोगी होती है।
3. लेकेसिस: पीरियड्स से पहले बेचैनी रहना, गर्मी अधिक लगना, शरीर के बाईं ओर की समस्याएँ अधिक होना।
4. कल्केरिया कार्ब: मोटे व थुलथुले रोगियों में सहायक, अधिक पसीना आना, जल्दी थकावट महसूस होना, शरीर में सुस्ती रहना।

5. थूजा: सिस्ट बनने की प्रवृत्ति होना, हार्मोनल असंतुलन रहना, त्वचा संबंधी समस्याएँ बनी रहना आदि।

6. नेट्रम म्यूर: तनाव के कारण हार्मोनल गड़बड़ी रहना, सिरदर्द होते रहना, मासिक धर्म अनियमित पाया जाना।

7. ऐपिस: ओवरी की जगह सूजन होना, चुभन या जलन वाला दर्द रहना।

इस रोग में सावधानियाँ: बिना चिकित्सकीय सलाह दवा न लें। केवल इंटरनेट देखकर या किसी के बताने के आधार पर दवा लेना हानिकारक हो सकता है। यदि अत्यधिक रक्तस्राव, तेज दर्द या लंबे समय तक पीरियड्स बंद रहें तो स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया जाना चाहिए।  होम्योपैथी सहायक उपचार के रूप में बहुत उपयोगी हो सकती है, लेकिन नियमित जांच और जीवनशैली सुधार भी इसमें अत्यंत आवश्यक हैं।

निष्कर्ष: पीसीओडी आजकल महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल समस्या है, लेकिन सही खानपान, नियमित व्यायाम, तनाव व मोटापा नियंत्रण तथा उचित उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। होम्योपैथिक उपचार व्यक्ति विशेष के लक्षणों के आधार पर राहत देने में सहायक माना जाता है। योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से ही सम्पर्क किया जाना चाहिए।

-डॉ..एम.एल जैन " मणि " अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य होम्योपैथिक विश्वविद्यालय ,जयपुर



 


ताज़ा खबर

Copyright @ 2026 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.